अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत बीच में ही टूट गई है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुए मैराथन दौर के बाद भी दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सके। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ़ कर दिया है कि वह ईरान को यूरेनियम संवर्धन रोकने के लिए 20 साल का समय देने के पक्ष में नहीं हैं।

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इस्लामाबाद वार्ता में क्या हुआ और क्यों हुई विफलता

12 से 14 अप्रैल 2026 के बीच इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच लंबी बातचीत चली। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने बातचीत का नेतृत्व किया। बातचीत के दौरान मुख्य विवाद यूरेनियम संवर्धन रोकने की समय सीमा को लेकर था।

  • अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन को कम से कम 20 साल तक रोकने का प्रस्ताव रखा था।
  • ईरान ने इसके जवाब में केवल 5 साल तक रोकने का प्रस्ताव दिया।
  • अमेरिकी टीम ने ईरान के 5 साल वाले प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया।
  • राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि दबाव बढ़ाने से ईरान अंततः परमाणु हथियार न बनाने की मांग मान लेगा।

अन्य देशों की भूमिका और आधिकारिक बयान

इस मामले में इजरायल और रूस ने भी अपनी राय रखी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कन्फर्म किया कि ईरान के 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम को हटाना और भविष्य में संवर्धन पर रोक लगाना ट्रंप की प्राथमिकता है। वहीं रूस ने एक अलग प्रस्ताव दिया है।

देश/अधिकारी मुख्य स्टैंड/प्रस्ताव
रूस ईरान के समृद्ध यूरेनियम स्टॉक की कस्टडी लेने का प्रस्ताव दिया है।
J.D. Vance कहा कि परमाणु हथियार रोकने के तंत्र पर राष्ट्रपति ट्रंप कोई समझौता नहीं करेंगे।
Christine Wormuth बताया कि ईरान के लिए परमाणु कार्यक्रम उनके राष्ट्रीय गौरव का विषय है।

फिलहाल अधिकारी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के आयोजन पर विचार कर रहे हैं।