डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी किसानों की मदद के लिए एक नया और बड़ा प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत ईरान के उन पैसों का इस्तेमाल किया जाएगा जिन्हें अमेरिका ने फ्रीज कर रखा है। ट्रम्प चाहते हैं कि इन पैसों से अमेरिका का अनाज खरीदा जाए ताकि अमेरिकी किसानों के लिए नया बाजार खुले और उनकी कमाई बढ़े।
इस पूरे मामले की शुरुआत 22 जून 2026 को हुई जब उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने स्विट्जरलैंड में बातचीत के दौरान यह विचार रखा। उन्होंने बताया कि यह प्लान Jared Kushner ने कतर के साथ मिलकर तैयार किया है। इसके बाद 24 और 25 जून को राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बात की पुष्टि की।
क्या है यह पूरा प्लान
इस योजना के मुताबिक, ईरान के करीब 6 अरब डॉलर कतर के बैंक खातों में जमा हैं। ट्रम्प प्रशासन चाहता है कि इन पैसों को अमेरिकी किसानों को मक्का, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलें बेचने के लिए इस्तेमाल किया जाए। ट्रम्प ने साफ कहा कि ईरान के लिए खाने-पीने का सामान सिर्फ और सिर्फ अमेरिका से ही खरीदा जाएगा। अमेरिका का Treasury Department इन पैसों को एक खास अकाउंट (escrow) में रख सकता है जिसे अमेरिका कंट्रोल करेगा।
ईरान ने जताया कड़ा विरोध
दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान के यूएन राजदूत Ali Bahreini ने कहा कि अपने पैसों का इस्तेमाल कैसे करना है, इसका फैसला सिर्फ ईरान ही करेगा और इसमें किसी दूसरे देश का कोई रोल नहीं होगा। ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने भी कहा कि उन्हें अमेरिकी सामान खरीदने की कोई कानूनी मजबूरी नहीं है, हालांकि अगर दाम और क्वालिटी अच्छी हुई तो वे विचार कर सकते हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने भी यही बात दोहराई कि तेहरान अपने हित के हिसाब से फैसला लेगा।
एक्सपर्ट्स और किसानों की राय
अमेरिका के कुछ किसान इस प्लान को लेकर उलझन में हैं और उन्हें लगता है कि यह हकीकत में मुमकिन नहीं है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के जानकारों का कहना है कि अरबों डॉलर के इस लेन-देन की प्रक्रिया काफी पेचीदा होगी। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अपने पुराने व्यापारिक साथियों को छोड़कर अमेरिका की तरफ नहीं आएगा।
अगर इतिहास को देखें तो 1979 की क्रांति से पहले अमेरिका और ईरान के बीच खेती के सामान का काफी व्यापार होता था। लेकिन उसके बाद यह व्यापार कम होता गया। अमेरिका से ईरान में गेहूं का निर्यात 2012 में, मक्का का 2015 में और सोयाबीन का 2018 में पूरी तरह बंद हो गया था।
