Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हेलीकॉप्टर के पास आया यात्री विमान, हवा में टली बड़ी टक्कर

अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है जहाँ देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ले जा रहा सैन्य हेलीकॉप्टर मरीन वन एक यात्री विमान के बेहद करीब आ गया। इस घटना के बाद से अमेरिकी हवाई क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और संघीय विमानन प्रशासन यानी एफएए ने इस पूरे मामले की उच्च स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
हवा में सिर्फ 1 मील से भी कम रह गई थी दोनों विमानों की दूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डरावनी घटना 06 अगस्त को दोपहर करीब 2:30 बजे उस समय घटी जब राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस से अपनी लॉस एंजिल्स की तय यात्रा के पहले चरण के तहत जॉइंट बेस एंड्रयूज जाने के लिए रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान राष्ट्रपति को ले जा रहा मरीन वन और एनवॉय एयर कंपनी का एम्ब्रेयर ई170 यात्री विमान एक-दूसरे के इतने करीब आ गए कि दोनों के बीच की दूरी एक मील से भी कम रह गई थी। जानकारों के अनुसार यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी क्योंकि दोनों विमान आपस में टकराने की स्थिति के मुहाने पर पहुँच गए थे।
विशेषज्ञों द्वारा दी गई शुरुआती तकनीकी जानकारी के मुताबिक, मरीन वन यात्री विमान से मात्र 0.8 मील की हॉरिजॉन्टल यानी क्षैतिज दूरी और 700 फीट की वर्टिकल यानी ऊर्ध्वाधर दूरी पर आ गया था। विमानन नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में 1.5 मील की हॉरिजॉन्टल दूरी या 500 फीट की वर्टिकल दूरी को नियम का उल्लंघन माना जाता है, हालांकि यह विमानों के प्रकार और एयरस्पेस के हिसाब से बदल भी सकता है।
टावर से बातचीत साफ न होने और कंट्रोलर्स की चूक से टला हादसा
फ्लाइट ट्रैकिंग और ऑडियो रिकॉर्डिंग से पता चलता है कि उड़ान भरने से पहले मरीन वन के क्रू ने नेशनल एयरपोर्ट टावर के कंट्रोलर्स को तीन बार चेतावनी दी थी कि वे उड़ान भरने से तीन मिनट की दूरी पर हैं। लेकिन ऐसा समझा जा रहा है कि कंट्रोलर्स ने क्रू की इस चेतावनी को ठीक से नहीं सुना, जिसकी वजह से हेलीकॉप्टर आगे बढ़ गया और सीधे एनवॉय एयर के यात्री विमान के रास्ते में आ गया। बताया जा रहा है कि रोनाल्ड रीगन नेशनल एयरपोर्ट के टावर के साथ बातचीत साफ न होने के कारण हवाई यातायात नियंत्रकों को आसपास के विमानों को समय पर हटाने में भारी देरी हो गई थी।
यह वाकया इसलिए भी ज्यादा डरावना माना जा रहा है क्योंकि ठीक पिछले साल 29 जनवरी को वाशिंगटन के इसी हवाई क्षेत्र में एक सैन्य हेलीकॉप्टर और एक यात्री विमान के बीच भयानक टक्कर हो चुकी है, जिसमें करीब 69 लोगों की अपनी जान गंवानी पड़ी थी। उस पुरानी घटना की याद ताजा होने के कारण इस बार के इस वाकये ने आम लोगों और अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
व्हाइट हाउस और प्रशासन ने दी सफाई, कहा- राष्ट्रपति को नहीं था कोई खतरा
घटना के तूल पकड़ने के बाद व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने बयान जारी करते हुए कहा कि मरीन वन को दुनिया के सबसे बेहतरीन और कुशल पायलट उड़ाते हैं, और व्हाइट हाउस को उनकी दक्षता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि कुछ पलों के लिए दोनों विमानों के बीच की दूरी काफी कम हो गई थी, लेकिन उस दौरान राष्ट्रपति को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं था। इसके बावजूद व्हाइट हाउस राष्ट्रपति की सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की नए सिरे से समीक्षा कर रहा है।
संघीय विमानन प्रशासन की प्रवक्ता कैसेंड्रा नोलन ने भी शुरुआती सुरक्षा समीक्षा का हवाला देते हुए यही बात दोहराई कि कुछ पल के लिए दूरी जरूर कम हुई थी लेकिन राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित थे और उन्हें कोई खतरा नहीं था। इसके अलावा मरीन कॉर्प्स के प्रवक्ता कैप्टन जैकब एम. सुग ने इस उड़ान को पूरी तरह सामान्य करार दिया है, हालांकि उन्होंने इस घटना से जुड़े अन्य विस्तृत सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया है।
फ्लाइटअवेयर ट्रैकिंग वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, एनवॉय एयर का यह यात्री विमान मंगलवार दोपहर 2:18 बजे रीगन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरते समय अपने तय समय से 34 मिनट की देरी पर था और करीब 16 मिनट बाद दोपहर 2:34 बजे हवा में पहुंचा था। इसी तरह ट्रंप को लेकर उड़ने वाला मरीन वन दोपहर 2:33 बजे व्हाइट हाउस के पास से रवाना हुआ था और यह यात्री विमान बाद में दोपहर 3:33 बजे पेन्साकोला में सुरक्षित उतर गया था। इस घटना के बाद से अमेरिका में हवाई यात्रा की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से कड़े कदम उठाने की मांग उठने लगी है।