अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट में एक बड़ा समझौता कराने की कोशिश में जुटे हैं। इस समझौते के जरिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने और अब्राहम अकॉर्ड का दायरा बढ़ाने की तैयारी चल रही है। हालांकि, ईरान के साथ बातचीत की रफ्तार को लेकर आलोचना भी हो रही है, लेकिन ट्रंप का कहना है कि यह डील लगभग फाइनल होने के करीब है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण खबर है।
क्या है ट्रंप का यह नया प्लान और ईरान का इसपर क्या रुख है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि ईरान के साथ एक बड़ा समझौता लगभग तय हो चुका है। इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोला जाएगा, जिससे समुद्री व्यापार और तेल की आवाजाही आसान हो सकेगी। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ किया है कि जब तक समझौते पर पूरी तरह हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक अमेरिकी पाबंदी लागू रहेगी। दूसरी तरफ, ईरान के अधिकारियों का कहना है कि समझौता इतनी जल्दी होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अमेरिका अपनी शर्तों में बदलाव कर रहा है। ईरान के अनुसार, उनका पहला ध्यान युद्ध को खत्म करने पर है, और परमाणु मुद्दों पर बातचीत बाद में होगी।
कौन-कौन से देश इस बातचीत में शामिल हैं और इस समझौते से क्या बदलेगा?
इस बड़े समझौते को लेकर कई देशों के बीच बातचीत चल रही है जिसमें कई प्रमुख पक्ष शामिल हैं:
- अमेरिका: राष्ट्रपति ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके विशेष दूत बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।
- मध्यस्थ देश: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और कतर इस मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं।
- क्षेत्रीय देश: ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं से इस समझौते को लेकर बातचीत की है।
- इसराइल: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के लिए इस अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होना जरूरी है, जिससे क्षेत्र में शांति स्थापित की जा सके।
आम लोगों और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और व्यापारिक रास्तों में से एक है। इसके बंद होने या यहां तनाव बढ़ने से खाड़ी देशों में व्यापार और जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित होता है। अगर यह रास्ता पूरी तरह खुलता है, तो भारत और अन्य एशियाई देशों से खाड़ी देशों में आने वाले सामान की डिलीवरी आसान हो जाएगी। इससे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है और खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों के रोजगार और रोजमर्रा के खर्चों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह खोल दिया जाएगा?
प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को समुद्री रास्ते से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी और जहाजों को आने-जाने की अनुमति देनी होगी, जिसके बदले अमेरिका अपनी पाबंदियों में ढील दे सकता है।
अब्राहम अकॉर्ड में कौन से नए देश शामिल हो सकते हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन इस समझौते का हिस्सा बनें, हालांकि कुछ देश अभी इस पर विचार कर रहे हैं।