अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच विवाद बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला एक बड़ा समझौता इसराइल के हमलों की वजह से टल गया। ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि उनमें समझ की कमी है, हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के साथ होने वाली डील अभी भी ट्रैक पर है।

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बेरूत हमले से बिगड़ा मामला

14 जून 2026 (रविवार) को अमेरिका और ईरान के बीच ‘100 दिनों के युद्ध’ को खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता होना था। ट्रंप ने बताया कि यह समझौता रविवार दोपहर को साइन होना था, लेकिन बेरूत में इसराइल के अचानक हुए सैन्य हमले ने व्हाइट हाउस को चौंका दिया। इस अनियोजित हमले की वजह से समझौते की प्रक्रिया में तुरंत देरी हो गई।

ट्रंप ने जताई नाराजगी

Axios को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने नेतन्याहू पर बहुत गुस्सा जताया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि बिबी (Netanyahu) में बिल्कुल भी जजमेंट नहीं है और यह स्थिति इतनी खराब है कि वह यकीन नहीं कर पा रहे हैं। ट्रंप ने पहले भी इसराइल को चेतावनी दी थी कि वह ईरान समर्थित हिजबुल्ला के साथ अपने संघर्ष में बेरूत पर हमला न करे।

इसराइल और ईरान का रुख

इसराइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ट्रंप की इन टिप्पणियों को एक बड़ा अपमान बताया है। उनका कहना है कि एक रणनीतिक साथी से यह उम्मीद करना कि वह लेबनान में हमला न करे, यह संभव नहीं है। वहीं, इसराइल ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले इस समझौते का हिस्सा नहीं है।

समझौते की शर्तें और विवाद

अमेरिका ने कन्फर्म किया है कि ईरान के साथ होने वाली इस डील में लेबनान का मुद्दा भी शामिल है। ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा था कि युद्ध खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई पूरी तरह बंद करनी होगी, इमारतों को गिराना बंद करना होगा, कैदियों को छोड़ना होगा और इसराइल को लेबनान से अपनी सेना हटानी होगी।

नेतन्याहू ने लेबनान से सेना हटाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसके बाद उन्होंने लेबनान में सैन्य अभियान बढ़ाने का आदेश दिया और दो बड़े शहरों को खाली करने का फरमान सुनाते हुए 100 से ज्यादा जगहों पर हमले करवाए। दूसरी तरफ, ईरान के अधिकारी Qalibaf ने संकेत दिया है कि अगर शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो समझौते की बातचीत आगे नहीं बढ़ पाएगी।