अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच एक मुश्किल बातचीत हुई है। इस चर्चा में ईरान के साथ नए सिरे से समझौता करने की कोशिश की गई है। Trump ने Netanyahu को बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) को लेकर बातचीत अब 30 दिनों तक चलेगी।

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30 दिन की बातचीत और नए शांति प्रस्ताव में क्या है

इस नए शांति प्रस्ताव को कतर और पाकिस्तान ने तैयार किया है। इसमें सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे देशों ने भी अपनी मदद दी है। इस योजना के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ साइन होगा जिससे युद्ध को आधिकारिक तौर पर खत्म किया जा सके। इसके बाद 30 दिनों की बातचीत का समय मिलेगा जिसमें मुख्य रूप से दो बातों पर चर्चा होगी। पहली यह कि Strait of Hormuz को फिर से खोला जाए और दूसरी यह कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाई जाएं।

अमेरिका, इसराइल और ईरान का इस मुद्दे पर क्या रुख है

  • Benjamin Netanyahu: इसराइल के प्रधानमंत्री इस प्रस्ताव को लेकर काफी संदेह में हैं और वह ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने के पक्ष में हैं।
  • Donald Trump: राष्ट्रपति Trump ने कहा कि वह किसी जल्दबाजी में नहीं हैं लेकिन उन्हें भरोसा है कि यह युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा।
  • Iran: ईरान इस समय अमेरिकी प्रस्ताव की जांच कर रहा है लेकिन उसके विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि परमाणु संवर्धन उनके अधिकार में है और इस पर बातचीत नहीं होगी।
  • JD Vance: उपराष्ट्रपति JD Vance ने चेतावनी दी है कि अगर परमाणु बातचीत नाकाम हुई तो Trump सैन्य कार्रवाई शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

विदेश मंत्री Marco Rubio ने Strait of Hormuz में ईरान की गतिविधियों को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव से बात की है और एक सुरक्षा प्रस्ताव पर भी चर्चा की है। इससे पहले Trump ने खाड़ी देशों के अनुरोध पर ईरान पर होने वाले हमलों को रोक दिया था और शांति समझौते की बात कही थी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मुख्य मुद्दे क्या हैं

इस बातचीत में मुख्य रूप से Strait of Hormuz को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर चर्चा की जाएगी।

शांति प्रस्ताव को किन देशों ने तैयार किया है

इस प्रस्ताव का मसौदा कतर और पाकिस्तान ने तैयार किया है जिसमें सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र ने भी सहयोग दिया है।