अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद अब खुलेआम सामने आ गए हैं। ट्रंप ने नेतन्याहू के फैसलों पर कड़ी नाराजगी जताई और उन्हें ‘पागल’ तक कह दिया। यह पूरा विवाद ईरान के साथ होने वाले शांति समझौते और लेबनान में चल रही सैन्य कार्रवाई को लेकर है।

फ्रांस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन (G7 summit) के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह नेतन्याहू के हालिया कामों से खुश नहीं हैं। ट्रंप के मुताबिक नेतन्याहू को लेबनान के मामले में ज्यादा जिम्मेदार होने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जताई कि इजराइल की मौजूदा हरकतों की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला शांति समझौता खतरे में पड़ सकता है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ जंग बहुत ज्यादा लंबी खिंच गई है और इसमें बहुत से लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को सीरिया ज्यादा बेहतर तरीके से संभाल सकता था। 18 जून को शिखर सम्मेलन के अंत में ट्रंप ने ईरान समझौते पर दोबारा बात की और नेतन्याहू की आलोचना जारी रखी।

जानकारी के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौता यानी समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार हुआ है। 18 जून को इसे रिमोटली साइन किया गया और अब 19 जून को जेनेवा में इस पर औपचारिक रूप से दस्तखत होंगे। इस डील में सभी मोर्चों पर, खासकर लेबनान में सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की बात कही गई है। इसके साथ ही ईरान को तेल निर्यात करने की अनुमति भी मिलेगी।

दूसरी तरफ बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने 15 जून को एलान किया कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेंगे, चाहे इसके लिए कोई समझौता हो या न हो। उन्होंने लेबनान से अपनी सेना हटाने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि इजराइल गाजा, लेबनान और सीरिया में तब तक सुरक्षा जोन बनाए रखेगा जब तक जरूरत होगी।

दोनों देशों के बीच रणनीतिक सोच में बड़ा अंतर है। पूर्व नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने बताया कि ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म करना है, जबकि इजराइल का मकसद वहां के नेतृत्व को निशाना बनाना है। यही वजह है कि जहां ट्रंप ईरान के साथ शांति डील करना चाहते हैं, वहीं नेतन्याहू सैन्य दबाव बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।