अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने G7 समिट के दौरान कतर के अमीर Sheikh Tamim Bin Hamad Al-Thani से मुलाकात की. इस मीटिंग में अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते पर चर्चा हुई, जिसे दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अच्छा बताया. इसी दौरान Trump ने इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu पर तीखा हमला बोला और कहा कि अगर वह नहीं होते तो इसराइल का अस्तित्व ही नहीं होता.
ईरान के साथ शांति समझौता और शर्तें
फ्रांस के Evian-les-Bains में 16 जून 2026 को हुई इस मुलाकात में US-Iran समझौते (MOU) पर बात हुई. यह समझौता 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए युद्ध को खत्म करने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के लिए किया गया है. इस डील की शर्तें 14 जून 2026 को तय हो गई थीं. Trump ने साफ किया कि इस समझौते के दूसरे चरण में अमेरिका ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं करेगा.
इसराइल और लेबनान पर Trump का सख्त रुख
Trump ने Benjamin Netanyahu को चेतावनी दी कि उन्हें लेबनान के मामले में ज़्यादा ज़िम्मेदार होना होगा. उन्होंने लेबनान में चल रहे युद्ध को छोटा बताया और कहा कि वह हिज़बुल्लाह से बात करके इस मामले को सुलझाना चाहते हैं. खबरों के मुताबिक, Trump और Netanyahu के बीच एक फोन कॉल पर काफी बहस हुई, जिसमें Trump ने उन्हें क्रेज़ी (crazy) तक कह दिया. Trump ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की, तो उस पर भारी हमला होगा.
दूसरे देशों और नेताओं की प्रतिक्रिया
- कतर: अमीर Sheikh Tamim ने इस समझौते का स्वागत किया और इसे शांति और आर्थिक विकास के लिए बड़ा कदम बताया.
- इसराइल: Benjamin Netanyahu ने ट्रंप की बातों को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा कि उनकी सेना गाजा, लेबनान और सीरिया में तब तक रहेगी जब तक ज़रूरत है.
- ईरान: विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अगर इसराइल लेबनान में हमले जारी रखता है, तो यह समझौते का उल्लंघन होगा.
- हिज़बुल्लाह: इस MOU का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे सभी मोर्चों पर युद्धविराम होगा.
- UN: महासचिव António Guterres ने इस डील की तारीफ की और पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों की मध्यस्थता की सराहना की.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि यह समझौता अभी एक सामान्य दस्तावेज़ है और इसकी कई बारीकियों पर अभी और बातचीत होनी बाकी है.