अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई है। यह बातचीत रविवार, 7 जून 2026 को हुई जब उत्तरी इसराइल पर ईरानी मिसाइल हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से तुरंत बात कर उन्हें इसराइल की तरफ से किसी भी जवाबी कार्रवाई को न करने की सलाह दी है। ट्रंप का कहना है कि दोनों पक्षों की तरफ से हमले हो चुके हैं और अब क्षेत्र में तनाव को बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के दौरान साफ किया कि ईरान ने जो मिसाइल हमले किए, उनसे कोई गंभीर नुकसान या मौतें नहीं हुई हैं। उन्होंने नेतन्याहू से कहा कि दोनों देशों ने अपनी बारी खेल ली है। इसराइल ने अपना हमला कर लिया और ईरान ने अपना हमला कर दिया, अब हमें एक और हमले की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ एक अंतिम समझौते के बेहद करीब पहुंच चुका है और वे नहीं चाहते कि इस संवेदनशील समय में कोई नया विवाद खड़ा हो। ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि इसराइल ने पहले ही पर्याप्त जवाब दे दिया है और अब रुकने का समय है।

क्या अमेरिका इसराइल के अगले कदम में साथ देगा?

इसराइली मीडिया की खबरों के अनुसार, इसराइल के अधिकारी पहले से ही ईरान के हमलों का एक बेहद जोरदार और बड़ा जवाब देने की योजना बना रहे थे। लेकिन इसी बीच एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकार बराक राविद को बताया कि अगर इसराइल अमेरिकी सलाह के खिलाफ जाकर फिर से ईरान पर हमला करने का फैसला करता है, तो अमेरिका इस नए तनाव या सैन्य कार्रवाई में किसी भी तरह से शामिल नहीं होगा। अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वे अब और अधिक सैन्य टकराव के पक्ष में नहीं हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बातचीत कब हुई थी?

दोनों नेताओं के बीच यह फोन बातचीत रविवार, 7 जून 2026 को हुई, जिसकी पुष्टि इसराइली मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनलों ने की है।

ट्रंप ईरान पर दोबारा हमले के खिलाफ क्यों हैं?

ट्रंप का मानना है कि आगे हमले करने से क्षेत्रीय स्थिरता खराब होगी और अमेरिका का ईरान के साथ होने वाला अंतिम समझौता भी खतरे में पड़ सकता है।