Oil Price Alert: डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी, कच्चे तेल की कीमत पहुँच सकती है 200 डॉलर, ईरान विवाद से दुनिया में मची हलचल
कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ी बात कही है। उन्होंने संकेत दिया है कि तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में नौसेना की गतिविधियां तेज हो गई हैं। आम लोगों और व्यापारियों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है।
तेल की कीमतें 200 डॉलर तक क्यों जा सकती हैं?
डोनाल्ड ट्रम्प ने CNBC के एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें हैरानी है कि तेल की कीमतें अभी और ज्यादा नहीं बढ़ीं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें बताया जाता कि तेल 200 डॉलर के बजाय 90 डॉलर पर है, तो उन्हें आश्चर्य होता। दरअसल, मार्च 2026 में ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट आई थी कि ट्रंप प्रशासन ईरान युद्ध की स्थिति में 200 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के लिए तैयारी कर रहा था। 13 अप्रैल को अमेरिका द्वारा ईरान की नाकाबंदी की घोषणा के बाद कीमतें पहले ही 100 डॉलर पार कर चुकी थीं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव और अमेरिका का एक्शन
ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना को सख्त आदेश दिया है कि जो भी नाव स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में माइन बिछाएगी, उसे तुरंत मार गिराया जाए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि अमेरिका का इस समुद्री रास्ते पर पूरा कंट्रोल है और जब तक ईरान समझौता नहीं करता, यह रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा। दूसरी तरफ, IEA के चीफ फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा सुरक्षा संकट का सामना कर रही है।
तेल संकट और बाजार से जुड़ी मुख्य जानकारियां
| तारीख / संस्था | मुख्य विवरण |
|---|---|
| मार्च 2026 | ट्रम्प प्रशासन ने 200 डॉलर तेल की संभावना पर तैयारी की |
| 13 अप्रैल 2026 | तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँची |
| 21 अप्रैल 2026 | ट्रम्प ने CNBC इंटरव्यू में 200 डॉलर का जिक्र किया |
| 23 अप्रैल 2026 | नौसेना को संदिग्ध नावों को मारने का आदेश मिला |
| IEA (फातिह बिरोल) | दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा बताया |
| IEA डेटा | रोजाना 13 मिलियन बैरल तेल का नुकसान हो रहा है |
इस बीच पर्यावरण संगठन Greenpeace ने ट्रम्प के इन फैसलों का विरोध किया है। उनका कहना है कि दुनिया को अब जीवाश्म ईंधन को छोड़कर रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी अस्थिरता और युद्ध से बचा जा सके।