अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेंटागन को एक बड़ी जिम्मेदारी दी है. उन्होंने ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को जब्त करने के लिए एक विस्तृत सैन्य योजना बनाने का आदेश दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऑपरेशन अब तक का सबसे कठिन और जोखिम भरा मिशन हो सकता है. व्हाइट हाउस ने भी साफ कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है. यह रिपोर्ट 2 अप्रैल 2026 को सामने आई है जिसमें इस मिशन की जटिलताओं पर चर्चा की गई है.

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इस सैन्य ऑपरेशन के दौरान किस तरह के खतरे हो सकते हैं?

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह मिशन तकनीकी और भौगोलिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण है. पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा और जटिल स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशन बताया है. ईरान के परमाणु ठिकाने जमीन के काफी नीचे और मजबूत किलों की तरह बनाए गए हैं, जहां तक पहुंचना आसान नहीं होगा. इसके अलावा यूरेनियम के टैंकों से निकलने वाली जहरीली फ्लोरीन गैस से सैनिकों की जान को बड़ा खतरा हो सकता है. इसके लिए जवानों को खास तरह के हजमत सूट पहनने होंगे और बहुत सावधानी बरतनी होगी.

मिशन से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां और आंकड़े

अमेरिकी खुफिया विभाग ने बताया है कि उन्हें ईरान के यूरेनियम ठिकानों की सटीक लोकेशन की जानकारी है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को जून 2025 के बाद से इन ठिकानों की जांच करने का मौका नहीं मिला है. इस पूरे मिशन की रूपरेखा के बारे में कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

मुख्य बिंदु विवरण
यूरेनियम की मात्रा लगभग 450 किलोग्राम (60 प्रतिशत तक संवर्धित)
शामिल बल Delta Force, Navy SEALs और 82nd Airborne Division
सैनिकों की संख्या 1,000 से अधिक स्पेशल फोर्सेज जवान
मुख्य स्थान इस्फहान के पास स्थित सुरंग परिसर
ऑपरेशन की अवधि सफलतापूर्वक पूरा होने में कई हफ्ते लग सकते हैं

इस योजना में एक सुरक्षित घेरा बनाना, अस्थाई हवाई पट्टी तैयार करना और भारी खुदाई उपकरणों का इस्तेमाल करना शामिल है. ईरान ने फिलहाल अमेरिका के उन प्रस्तावों को खारिज कर दिया है जिसमें यूरेनियम को सरेंडर करने की बात कही गई थी. पेंटागन अब इस गुप्त और बहु-स्तरीय योजना पर काम कर रहा है ताकि राष्ट्रपति के आदेशों को पूरा किया जा सके.