अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की शुरुआत की है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। यह कदम उन तटस्थ देशों की मदद के लिए उठाया गया है जिनके जहाज वहां फंसे हुए हैं। हालांकि, इस एलान के तुरंत बाद ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना ने वहां घुसने की कोशिश की तो उन पर हमला होगा।

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प्रोजेक्ट फ्रीडम क्या है और अमेरिका की क्या तैयारी है?

डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को एक मानवीय कदम बताया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि इसका मुख्य उद्देश्य कमर्शियल जहाजों के लिए फिर से रास्ता खोलना है। अमेरिका ने इस मिशन के लिए भारी सैन्य तैनाती की है:

  • सैनिक बल: करीब 15,000 सर्विस मेंबर्स को इस काम में लगाया गया है।
  • हवाई ताकत: 100 से ज्यादा जमीन और समुद्र आधारित विमानों का उपयोग किया जाएगा।
  • जंगी जहाज: गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और कई ड्रोन प्लेटफॉर्म तैनात रहेंगे।

एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि यह मिशन क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है। अमेरिका ने यह भी साफ किया कि वह 13 अप्रैल 2026 से लागू समुद्री नाकाबंदी को जारी रखेगा।

ईरान की चेतावनी और समुद्र में बढ़ता तनाव

ईरान ने अमेरिका के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। ईरान के सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी है कि बाहरी सेनाओं, खासकर अमेरिकी सेना के आने पर उन पर सीधा हमला किया जाएगा। ईरान की संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकज़ाद ने बताया कि वहां से गुजरने के लिए ईरानी अधिकारियों की अनुमति जरूरी होगी और इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को वहां आने की इजाजत नहीं मिलेगी।

तनाव के बीच 4 मई 2026 को एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल गिरने की खबर आई है। गनीमत यह रही कि जहाज के सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं।

जहाजों के लिए नया रास्ता और नाविकों की स्थिति

Joint Maritime Information Center (JMIC) ने जहाजों के लिए एक ‘एन्हांस्ड सिक्योरिटी एरिया’ बनाया है। उन्होंने सलाह दी है कि भारी ट्रैफिक और समुद्री सुरंगों (mines) के खतरे को देखते हुए जहाज ओमान के समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करें।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime Organization) के आंकड़ों के मुताबिक, इस संघर्ष की वजह से अब तक करीब 20,000 नाविक और सैकड़ों जहाज वहां फंसे हुए हैं, जो लंबे समय से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

प्रोजेक्ट फ्रीडम की शुरुआत कब हुई और इसका मकसद क्या है?

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 4 मई 2026 को हुई। इसका मकसद उन तटस्थ और मासूम देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाना है जो होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं।

ईरान ने अमेरिका के इस कदम पर क्या प्रतिक्रिया दी है?

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना ने जलडमरूमध्य में घुसने की कोशिश की तो उन पर हमला किया जाएगा। साथ ही ईरान ने जहाजों के लिए अनुमति अनिवार्य कर दी है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com