अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर तेहरान सरकार के खिलाफ अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। वे लगातार ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दे रहे हैं और सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी सीधे हमले को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है, लेकिन व्हाइट हाउस की गतिविधियों ने मध्य पूर्व में हलचल बढ़ा दी है। ईरान में गहरे आर्थिक संकट और सरकारी दमन के खिलाफ उठी आवाजें अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुकी हैं। इस बीच, ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों का खून बहना जारी रहा, तो अमेरिका मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा और इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पूरी दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि यह फैसला पूरे क्षेत्र की भू-राजनीति को बदल सकता है।

ईरानी देशभक्तों के लिए ट्रंप का खुला संदेश- ‘मदद रास्ते में है, अपनी संस्थाओं पर कब्जा जमाओ और अत्याचारियों को चिन्हित करो’

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए ट्रंप ने ईरानी जनता को सीधे संबोधित किया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए लिखा कि ईरानी देशभक्तों को अपना विरोध जारी रखना चाहिए और अपनी सरकारी संस्थाओं पर कब्जा कर लेना चाहिए। ट्रंप ने अपने संदेश में साफ कहा कि हत्यारों और अत्याचारियों के नाम सुरक्षित रखे जाएं, क्योंकि उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। “हेल्प ऑन द वे है” (मदद रास्ते में है) और “अमेरिका मदद के लिए तैयार है” जैसे वाक्यों का प्रयोग कर उन्होंने संकेत दिया है कि वे ईरान में चल रहे आंदोलन को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के पक्ष में हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी प्रस्तावित बैठकों को तब तक के लिए रद्द कर दिया है, जब तक कि निर्दोष प्रदर्शनकारियों की हत्याएं बंद नहीं हो जातीं। उनका मानना है कि ईरान इस समय आजादी की ओर देख रहा है, जैसा शायद पहले कभी नहीं देखा गया।

हजारों प्रदर्शनकारियों की मौत और सत्ता परिवर्तन की गूंज: खामेनेई ने झुकने से किया इनकार तो ईरानी संसद ने दी अमेरिकी ठिकानों को उड़ाने की धमकी

ईरान में दिसंबर से मुद्रा संकट के कारण शुरू हुए प्रदर्शन अब विकराल रूप ले चुके हैं और पूरे देश में फैल गए हैं। प्रदर्शनकारी अब केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 2000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है, जिससे स्थिति और विस्फोटक हो गई है। इसके बावजूद, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार पीछे नहीं हटेगी। दूसरी ओर, तनाव इतना बढ़ गया है कि ईरानी संसद के स्पीकर ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप ने ईरान पर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने के आरोपों को दरकिनार करते हुए तेहरान को “मानवता दिखाने” की सलाह दी है और चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर उन्हें “बहुत बुरे परिणामों” का सामना करना पड़ेगा।

सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर गंभीर विचार: वेनेजुएला ऑपरेशन की तर्ज पर ईरान को ‘वहां चोट पहुंचाने’ की तैयारी जहां सबसे ज्यादा दर्द हो

व्हाइट हाउस के भीतर ईरान से निपटने के लिए सैन्य और रणनीतिक विकल्पों पर मैराथन चर्चाएं चल रही हैं। ट्रंप को ईरान पर स्ट्राइक के कई विकल्प सुझाए गए हैं, जिनमें तेहरान के भीतर गैर-सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाना भी शामिल है। सलाहकारों ने स्ट्राइक प्लान तैयार कर लिए हैं, लेकिन राष्ट्रपति ने अभी अंतिम मुहर नहीं लगाई है और वे कूटनीतिक रास्तों के लिए भी खुले हैं। ट्रंप का जोर इस बात पर है कि ईरान पर कार्रवाई उतनी ही प्रभावी होनी चाहिए, जितनी वेनेजुएला में सफल ऑपरेशन के दौरान देखी गई थी। उनका मानना है कि ईरान को “बहुत जोर से वहां मारा जाना चाहिए, जहां उसे सबसे ज्यादा दर्द हो।” हालांकि, इजराइल और अरब देशों के अधिकारियों ने अमेरिका को फिलहाल सीधा हमला रोकने की सलाह दी है, लेकिन ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जून में हुए हवाई हमलों के बाद ईरान पहले से ही काफी कमजोर हो चुका है।

मंगलवार की अहम बैठक और 25 फीसदी टैरिफ का वार: दुनिया भर के देशों पर पड़ेगा असर, मध्य पूर्व में बड़े उलटफेर के संकेत

आने वाला समय ईरान और अमेरिका के संबंधों के लिए बेहद निर्णायक होने वाला है। ट्रंप मंगलवार को व्हाइट हाउस में अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं, जिसमें ईरान पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। सैन्य कार्रवाई के अलावा, आर्थिक मोर्चे पर भी घेराबंदी की तैयारी है। ईरान के साथ व्यापार करने वाले 100 से अधिक देशों पर 25% टैरिफ लगाने की योजना बनाई गई है, जिसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ना तय है। यह फैसला न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है, बल्कि उन देशों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है जो तेहरान के साथ कारोबारी रिश्ते रखते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि बदलाव के लिए कड़े फैसलों की जरूरत है।

GulfHindi Desk

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