अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत की तैयारी चल रही है, लेकिन मुख्य मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की बात कही गई थी।
ईरान और अमेरिका की मांगों में क्या है बड़ा अंतर?
दोनों देशों ने शांति के लिए अपनी-अपनी योजनाएं पेश की हैं, लेकिन उनमें बहुत फर्क है। ईरान ने 10 सूत्रीय शांति योजना बनाई है, जबकि अमेरिका की योजना 15 सूत्रीय है। ईरान चाहता है कि उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटा दिए जाएं और उसके यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार किया जाए। दूसरी तरफ अमेरिका की शर्तें काफी सख्त हैं।
| ईरान की मुख्य मांगें (10 पॉइंट प्लान) | अमेरिका की मुख्य मांगें (15 पॉइंट प्लान) |
|---|---|
| सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं | यूरेनियम भंडार खत्म करना और संवर्धन रोकना |
| Strait of Hormuz पर नियंत्रण और ट्रांजिट फीस | मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना |
| सैन्य हमलों पर पूरी तरह रोक लगे | क्षेत्रीय सहयोगियों को समर्थन देना बंद करना |
| युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त किया जाए | हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों की रिहाई |
Strait of Hormuz और टोल टैक्स पर क्या है पूरा विवाद?
ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से वह रियाल में पारगमन शुल्क वसूलेगा। कुछ रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने हर जहाज से 2 मिलियन डॉलर शुल्क लेने और इस कमाई को ओमान के साथ साझा करने की बात कही थी। अमेरिका ने इस बात को पूरी तरह गलत बताया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में ट्रांजिट शुल्क की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने इसे एक खराब समझौता बताया और चेतावनी दी कि अमेरिका ने खुद को केवल बातचीत की गुंजाइश बनाए रखने के लिए संयमित रखा है। इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल से ईमानदारी से बातचीत करने को कहा है।
