अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ एक समझौता होने वाला है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ईरान में शासन बदलने की कोशिश नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत फेल हुई तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।
राष्ट्रपति Trump ने 6 जुलाई 2026 को कहा कि अमेरिका परमाणु समझौते के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि या तो समझौता होगा या फिर वह इस काम को खत्म कर देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका के पास ऐसी ताकत है जिससे वह ईरान के पुलों और बिजली-तेल की सप्लाई जैसे बुनियादी ढांचे को एक दोपहर में तबाह कर सकता है।
परमाणु हथियार और शासन पर रुख
Trump ने साफ तौर पर कहा कि ईरान के पास किसी भी हाल में Nuclear Weapon नहीं हो सकता। शासन बदलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह इसे सीधे तौर पर नहीं खोज रहे हैं, लेकिन उनके हिसाब से ईरान में पहले ही एक बदलाव आ चुका है। उन्होंने कहा कि पिछला शासन जा चुका है और अब जो नेतृत्व है, वह पहले के मुकाबले ज़्यादा समझदार और तर्कसंगत व्यवहार कर रहा है।
समझौते की मुख्य बातें और MoU
बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए 15 जून 2026 को एक Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इस शुरुआती ढांचे के मुख्य उद्देश्य ये हैं:
- लड़ाई को पूरी तरह खत्म करना।
- Strait of Hormuz को दोबारा खोलना।
- 60 दिनों के लिए ceasefire को आगे बढ़ाना।
इस समझौते के तहत ईरान की शर्तों को पूरा करने पर प्रतिबंध हटाए जाएंगे और उनके अरबों डॉलर के फंसे हुए पैसे को वापस किया जाएगा। हालांकि, यूरेनियम के भंडार और परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों पर अभी बातचीत जारी है।
कौन लोग हैं इस बातचीत में शामिल
इस पूरी प्रक्रिया में अमेरिका की तरफ से Donald Trump, JD Vance, Marco Rubio और Jared Kushner जैसे बड़े नाम शामिल हैं। वहीं ईरान की तरफ से राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और विदेश मंत्री Abbas Araghchi बातचीत कर रहे हैं। इस तनाव को कम करने और बातचीत कराने में Qatar और Pakistan ने मुख्य मध्यस्थ (Mediators) की भूमिका निभाई है।
ईरान के अधिकारियों ने माना है कि कुछ प्रगति हुई है, लेकिन उन्होंने आगाह किया है कि अभी अंतिम समझौता होने में समय लग सकता है। फिलहाल दोनों देशों का ध्यान लड़ाई रोकने पर ज़्यादा है।
