अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क के सफर्न में एक भाषण के दौरान बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा और यह बात ईरान को भी बहुत अच्छे से पता है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा विवाद बहुत जल्द खत्म होने वाला है और अमेरिका इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

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इस मामले पर अमेरिकी अधिकारियों और अन्य देशों का क्या रुख है?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जानकारी दी है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपनी मर्जी से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा नहीं खोलेगा। अमेरिका और इसराइल दोनों इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसके अलावा, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बैठक में भी दोनों देश इस बात पर सहमत हुए थे कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड का इस्तीफा और मतभेद

इस बीच ट्रंप की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कुछ समय पहले बयान दिया था कि पिछले हमलों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो चुका है और उसे दोबारा शुरू करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। उनका यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप के दावों से अलग था। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावों को गलत बताया है और कहा है कि वे कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है लेकिन अभी भी कई मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इस विवाद में खाड़ी देश भी शामिल हैं?

सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे खाड़ी देश इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में देरी करने का अनुरोध किया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने क्या चेतावनी दी थी?

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो इससे पूरी दुनिया में हथियारों की एक नई होड़ शुरू हो जाएगी जो बेहद खतरनाक होगी।