अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि अमेरिका को Strait of Hormuz (होर्मुज समुद्री रास्ता) के मामले में यूरोप की किसी भी मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत बहुत अच्छे माहौल में चल रही है और इस वीकेंड तक एक बड़ी सहमति बनने की उम्मीद है। इस समझौते के बाद इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को जहाजों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।
ईरान के साथ बातचीत में क्या प्रगति हुई है?
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में एक नए आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह जानकारी दी। बातचीत के मौजूदा हालात इस प्रकार हैं
- डील होने की पूरी उम्मीद: ट्रम्प के अनुसार बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और ईरान समझौते पर दस्तखत करने के काफी करीब है।
- परमाणु हथियार पर रोक: ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और अमेरिका उसे ऐसा करने भी नहीं देगा।
- सफाई का काम होगा शुरू: समझौते पर दस्तखत होते ही समुद्री रास्ते को तुरंत खोल दिया जाएगा। पानी में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने की तैयारी भी शुरू की जा चुकी है।
तनाव और जहाजों की आवाजाही की क्या स्थिति है?
इस पूरे विवाद की वजह से इस रास्ते से होने वाली जहाजों की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है। सामान्य दिनों की तुलना में अभी पांचवें हिस्से से भी कम जहाज यहाँ से गुजर पा रहे हैं।
- ईरानी जहाजों का निकलना: हाल ही में अमेरिकी घेराबंदी के बीच पहली बार ईरान के 4 तेल टैंकर इस रास्ते से सुरक्षित निकले हैं।
- यूरोपीय देशों की धमकी: यूरोप के कुछ देशों ने पहले अमेरिका और ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर जल्द रास्ता नहीं खुला तो 40 देशों की एक फौज रास्ते की सुरक्षा के लिए भेजी जा सकती है।
- हमलों की वजह से बढ़ा तनाव: कुवैत में अमेरिकी बेस पर हुए हमले और कुवैत-बहरीन में ईरान के हमलों से स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाएगा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ने रास्ता खोलने के बदले ईरान पर से पाबंदियां हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। प्रतिबंध हटाने का फैसला केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने से जुड़ा है।
Strait of Hormuz के बंद होने का क्या असर हो रहा है?
इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बंद होने या कम होने से दुनिया भर में जरूरी सामानों और तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक मानवीय मदद पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं।
