अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेज, राष्ट्रपति ट्रंप ने आर्थिक दबाव के बीच दिए मिलाजुला बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव करते हुए कई तरह के बयान दिए हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी सरकार लगातार आर्थिक शिकंजा कस रही है, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने कभी सख्ती तो कभी नरमी दिखाने की बात कही है। 11 August 2026 को सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस भू-राजनीतिक तनाव को बहुत करीब से देखा जा रहा है ताकि आने वाले दिनों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा बयान
राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि ईरान की आर्थिक स्थिति इस समय बेहद खराब दौर से गुजर रही है और यह ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिक सकती है। उन्होंने अपने फैसलों का बचाव करते हुए तीन मुख्य रास्ते बताए जिनमें दबाव के तहत बातचीत जारी रखना, बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई करना या फिर आर्थिक प्रतिबंधों को और ज्यादा कड़ा करना शामिल है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के वित्तीय संसाधनों पर उनका पूरा नियंत्रण है और उन्होंने खुद को उनका बैंकर बताया। इसके अलावा उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हर हाल में रोका जाएगा। शांति वार्ता के दौरान उन्होंने ईरान से युद्ध हर्जाने की नई मांग भी रखी है, जिससे दोनों देशों के बीच विवाद और बढ़ गया है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य और अमेरिकी नौसेना का कड़ा पहरा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का होरमुज़ जलडमरूमध्य पर 100% नियंत्रण है और वहां से बारूदी सुरंगों को साफ कर दिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कमजोर अर्थव्यवस्था के बावजूद ईरान लगातार मुश्किलें पैदा करने की क्षमता रखता है। इससे पहले 10 August को ईरान ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने, प्रतिबंध खत्म करने, क्षेत्र से अमेरिकी सेना को हटाने, युद्ध हर्जाना देने और उनके रोके गए फंड को जारी करने की मांग रखी थी ताकि इस महत्वपूर्ण रास्ते को फिर से खोला जा सके।
सख्त पाबंदियों और कूटनीतिक रणनीतियों का दौर
ईरान पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी U.S. House of Representatives ने 10 August को एक नया और कड़ा प्रतिबंध प्रस्ताव आगे बढ़ाया है जिसके तहत इन पाबंदियों को साल 2031 तक बढ़ाने की तैयारी है। रक्षा सचिव Pete Hegseth ने भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए कहा कि इन प्रतिबंधों की वजह से ईरान की आर्थिक स्थिति टूटने के कगार पर पहुंच चुकी है। इन तमाम घटनाक्रमों से साफ है कि अमेरिका फिलहाल सीधी जंग के बजाय आर्थिक दबाव बढ़ाने की नीति पर काम कर रहा है।