Trump का बड़ा आदेश, Hormuz Strait में माइन बिछाने वाली नावों को ‘मारकर गिराने’ का फरमान, बढ़ सकता है तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने US Navy को एक बहुत ही सख्त आदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि Strait of Hormuz में अगर कोई भी छोटी नाव बारूदी सुरंगें यानी माइन्स बिछाते हुए पकड़ी जाती है, तो उसे तुरंत ‘शूट एंड किल’ यानी मारकर गिरा दिया जाए। Trump ने साफ कहा है कि इस आदेश को लागू करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। यह कदम समुद्र के इस महत्वपूर्ण रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।

Trump ने ‘शूट एंड किल’ का आदेश क्यों दिया?

यह आदेश 23 अप्रैल 2026 को Truth Social पोस्ट के जरिए दिया गया। दरअसल, इससे एक दिन पहले ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने Strait of Hormuz में तीन मालवाहक जहाजों पर हमला किया था, जिनमें से दो को उन्होंने कब्जे में ले लिया। इस तनाव के बीच Trump ने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि वे माइन्स हटाने के काम को तीन गुना बढ़ा दें। अमेरिका का मकसद इस रणनीतिक जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है।

आम आदमी और ग्लोबल मार्केट पर क्या पड़ेगा असर?

Strait of Hormuz दुनिया का एक ऐसा रास्ता है जहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस इलाके में तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया में ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने संकेत दिया है कि संघर्ष की वजह से गैस की कीमतें सितंबर के आखिर तक बढ़ी रह सकती हैं।

मुख्य जानकारी विवरण
घटना की तारीख 23 अप्रैल 2026
प्रभावित क्षेत्र Strait of Hormuz
तेल व्यापार प्रभाव वैश्विक व्यापार का 20%
नाबालिग कार्रवाई 16 ईरानी माइन-लेइंग जहाज खत्म किए गए
जब्त किया गया जहाज Majestic X (तेल तस्करी का शक)

अब तक अमेरिका ने क्या-क्या कदम उठाए हैं?

अमेरिकी सेना ने हाल ही में हिंद महासागर में Majestic X नाम के एक तेल टैंकर को पकड़ा है, जिस पर ईरानी तेल की तस्करी का शक था। CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने इस इलाके में ईरान के 16 माइन बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया है। हालांकि, पेंटागन ने कांग्रेस को एक गोपनीय ब्रीफिंग में बताया है कि इस पूरे रास्ते को माइन्स से पूरी तरह साफ करने में छह महीने का समय लग सकता है। फिलहाल अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव है।