अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि अमेरिका किसी भी हमले या धमकी को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेगा। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मिडल ईस्ट में ईरान और इसराइल के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। राष्ट्रपति ट्रंप दोनों देशों के बीच तुरंत युद्धविराम कराने की कोशिशों में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए सरकारी आदेशों पर हस्ताक्षर भी किए हैं।

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मिडल ईस्ट में शांति के लिए ट्रंप की कोशिशें और नया फैसला

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और इसराइल दोनों से तुरंत गोलाबारी रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि दोनों पक्ष तुरंत युद्धविराम चाहते हैं और इसके लिए शांति समझौते की बातचीत आखिरी दौर में चल रही है। हालांकि, ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने नए कड़े फैसलों पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे पहले फरवरी 2026 में अमेरिका ने बिना अपने नाटो सहयोगियों को बताए ईरान के खिलाफ एक सैन्य कार्रवाई भी की थी जिसके बाद से रिश्ते संवेदनशील बने हुए हैं।

यमन के हूती विद्रोहियों और हिजबुल्लाह के कारण बढ़ा तनाव

क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में इसराइली जहाजों पर बैन लगाने और मिसाइल हमला करने की घोषणा की है। वहीं दूसरी तरफ, इसराइल ने दक्षिणी लेबनान के टायर शहर को खाली करने का आदेश दिया क्योंकि वहां हिजबुल्लाह की मौजूदगी की खबरें हैं। हिजबुल्लाह ने इसराइल और लेबनान के बीच नए युद्धविराम समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया है जिससे तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

अमेरिकी नीतियों पर जनता की राय और विरोध

ट्रंप प्रशासन की नीतियों का अमेरिका में भी विरोध हो रहा है। हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 53 प्रतिशत अमेरिकी वोटर्स का मानना है कि ईरान के खिलाफ चल रहे इस विवाद से अमेरिका कम सुरक्षित हुआ है। इसके अलावा 84 प्रतिशत लोग केवल तभी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं जब अमेरिका पर सीधा खतरा मंडरा रहा हो। अमेरिकी कांग्रेस में भी ट्रंप सरकार की कुछ विदेशी सहायता नीतियों को पलटने के लिए नए बिल लाए गए हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ट्रंप ने ईरान और इसराइल को लेकर क्या अपील की है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और इसराइल दोनों से तुरंत गोलाबारी रोकने और तत्काल युद्धविराम लागू करने की अपील की है ताकि शांति स्थापित हो सके।

यमन के हूती विद्रोहियों ने क्या बड़ा कदम उठाया है?

हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में इसराइली जहाजों के चलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है और इसराइल पर मिसाइल हमला भी किया है।