अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए बताया है कि ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा सैन्य अभियान ‘Operation Epic Fury’ अब अंतिम चरण में है। उन्होंने दावा किया कि यह मिशन अगले दो से तीन हफ्तों में अपने लक्ष्य पूरे कर लेगा। इस अभियान में Israel भी अमेरिका का साथ दे रहा है जिसे ‘Operation Lion’s Roar’ का नाम दिया गया है। इस युद्ध का सीधा असर खाड़ी देशों (Gulf Countries) पर भी पड़ रहा है जहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा अब एक चर्चा का विषय बन गई है।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और अब तक की स्थिति

यह सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता और उसके कमांड सिस्टम को खत्म करना है। राष्ट्रपति Trump के अनुसार ईरान की नेवी और एयरफोर्स को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार यह ऑपरेशन अपनी तय योजना के हिसाब से काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

  • ईरान के सैन्य ढांचे और नेतृत्व पर जोरदार हमले किए गए हैं
  • Trump ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान नहीं माना तो उसके बिजली घरों को निशाना बनाया जाएगा
  • White House के मुताबिक ईरान के पास अब केवल समझौते का ही रास्ता बचा है
  • अमेरिकी सेना के अनुसार ईरान की नौसेना अब सक्रिय नहीं रह गई है
  • Defense Secretary Pete Hegseth ने स्पष्ट किया कि अमेरिका केवल सैन्य लक्ष्यों को निशाना बना रहा है

खाड़ी देशों पर युद्ध का असर और नुकसान के आंकड़े

इस जंग की वजह से सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों में रहने वाले लोगों के लिए भी मुश्किलें पैदा हुई हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इन देशों की तरफ कई ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। खाड़ी देशों ने इस बात पर नाराजगी भी जताई है कि उन्हें ईरान की ओर से होने वाले हमलों के लिए पर्याप्त समय और सूचना नहीं दी गई। इस तनाव के बीच भारतीय प्रवासियों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। नीचे दी गई टेबल में आप ईरान की जवाबी कार्रवाई से हुए नुकसान को देख सकते हैं:

विवरण जारी किए गए आंकड़े
दागी गई मिसाइलें कम से कम 380
ईरानी ड्रोन हमले 1,480 से ज्यादा
प्रभावित देश Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Qatar, Oman, Bahrain
कुल मौतें कम से कम 13
ऑपरेशन की अवधि अगले 2 से 3 हफ्ते और चलेगा

Donald Trump ने जोर देकर कहा है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को जल्द ही पूरा कर लेगा। हालांकि इस बीच ईरान की ओर से बातचीत की खबरों को नकारा गया है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोग और वहां काम करने वाले प्रवासी इस समय उड़ानों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं।