अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब खत्म होने की राह पर है। दोनों देशों ने युद्ध रोकने के लिए एक समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं, जिससे मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी भी हटा ली है।

17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने एक समझौता (MoU) साइन किया। इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है, जिसमें लेबनान भी शामिल है।

फ्रांस के एवियन-लेस-बेंस में हुई G7 कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin का शुक्रिया अदा किया। ट्रंप ने कहा कि चीन और रूस युद्ध के दौरान पूरी तरह तटस्थ रहे और उन्होंने निजी तौर पर बीजिंग से इस युद्ध में दखल न देने के लिए कहा था। ट्रंप के मुताबिक, अगर चीन दखल देता तो अमेरिका के लिए मुश्किलें बढ़ सकती थीं।

वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 18 जून 2026 को एलान किया कि ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक से नाकाबंदी हटा ली गई है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने इस समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि चीन इस फैसले से खुश है और उम्मीद करता है कि अमेरिका और ईरान अपने वादों को निभाएंगे। लिन जियान ने मध्य पूर्व में शांति के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रस्तावों का भी जिक्र किया।

हालांकि, स्विट्जरलैंड में 19 जून को होने वाली बातचीत को फिलहाल टाल दिया गया है। ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने 19 जून को बयान दिया कि अमेरिका के साथ होने वाली किसी भी बात में ईरान अपनी शर्तों और रेड लाइन्स का पूरा ध्यान रखेगा।

Sushma Kumari

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