अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके बंदरगाहों की घेराबंदी यानी blockade का रास्ता चुना है। ट्रंप का मानना है कि बमबारी करने के बजाय यह तरीका ज़्यादा असरदार है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि बहुत जल्द ईरान के साथ एक बड़ा समझौता हो सकता है जिससे तनाव कम होगा।
अमेरिका ने कैसे की ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक को रोकने का आदेश दिया था। इस सैन्य कार्रवाई के असर से समुद्र में काफी हलचल रही।
- जहाजों की संख्या: 23 मई तक इस ऑपरेशन की वजह से 100 से ज़्यादा कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया।
- सख्त कार्रवाई: 1 जून को अमेरिकी सेना ने एक खाली ऑयल टैंकर को रोक दिया जो अरब की खाड़ी में ईरान के बंदरगाह की तरफ जा रहा था।
- मकसद: इस पूरी घेराबंदी का लक्ष्य ईरान को बातचीत की मेज पर लाना और उस पर दबाव बनाना था।
क्या जल्द खत्म होगा ईरान और इसराइल का तनाव?
Donald Trump ने 9 जून को बयान दिया कि ईरान के साथ एक समझौता अगले दो या तीन दिनों में फाइनल हो सकता है। इस डील के ज़रिए ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की कोशिश की जाएगी।
ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को भी सलाह दी कि वे ईरान पर और हमले न करें और बातचीत को समय दें। इसके बाद इसराइल ने हमले रोक दिए। ताजा अपडेट के मुताबिक 8 जून को ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र सामान्य किया और इसराइल ने भी घरेलू पाबंदियों को कम करने का फैसला किया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कब शुरू की थी
CENTCOM ने 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने और जाने वाले समुद्री ट्रैफिक को रोकने का आदेश दिया था।
डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते के लिए क्या समय बताया है
9 जून को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता अगले दो या तीन दिनों में पूरा हो सकता है।
