अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना के ऑपरेशन्स की वजह से दुनिया में तेल की कीमतें 350 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुँचीं। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz में अमेरिकी जहाजों की मौजूदगी ने तेल टैंकरों के रास्ते को खुला रखा, जिससे ग्लोबल मार्केट में स्थिरता बनी रही।
Trump के मुताबिक, एक गुप्त सैन्य मिशन ने ईरान की नाकेबंदी को तोड़कर 10 करोड़ बैरल से ज़्यादा तेल को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने यह भी दावा किया कि 22 जून 2026 को रिकॉर्ड 1.9 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से निकला। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों में इस रिकॉर्ड की पुष्टि नहीं हुई है और कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतें बढ़कर 150 या 160 डॉलर तक जा सकती थीं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, Trump के समय में 3 मई 2026 को “Project Freedom” शुरू किया गया था। इसके तहत 15,000 सैनिक, 100 से ज़्यादा विमान और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात किए गए थे। इससे पहले 12 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी की थी और नियमों को न मानने वाले जहाजों को रोका था।
इस बीच व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने 11 मार्च 2026 को कहा था कि अमेरिका ने अभी तक किसी टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है, जबकि ऊर्जा सचिव Chris Wright ने पहले इसके विपरीत दावा किया था। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए समुद्र में माइन बिछाई थीं और रास्ते बंद किए थे।
ताज़ा अपडेट की बात करें तो 2 जुलाई 2026 तक अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MoU) हुआ है। इस समझौते के तहत 60 दिनों तक Strait of Hormuz से बिना किसी टोल के जहाजों को आने-जाने की अनुमति दी गई है। इसके बाद अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी हटाना शुरू कर दिया है और जहाजों की आवाजाही बढ़ी है। Joint Maritime Information Center (JMIC) ने 18 जून 2026 को खतरे के स्तर को कम करके ‘मॉडरेट’ कर दिया था।
इतने समझौते के बावजूद भी तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 26 से 29 जून 2026 के बीच अमेरिका और ईरान के बीच फिर से हमले हुए, जिसकी वजह से शिपिंग में दिक्कतें आईं। ईरान ने एक कार्गो शिप पर ड्रोन हमला किया था। अभी भी समुद्र में माइन का खतरा बना हुआ है, इसलिए JMIC ने जहाजों को ओमान के पास वाले दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल करने की सलाह दी है क्योंकि वह रास्ता सुरक्षित है।
