अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के उन देशों को कड़ी चेतावनी दी है जो अपनी तेल की जरूरतों के लिए Strait of Hormuz पर निर्भर हैं। ट्रंप ने कहा है कि अब इन देशों को अपनी देरी से आई हिम्मत दिखानी चाहिए और इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका अब इस रास्ते की सुरक्षा का बोझ अकेले नहीं उठाएगा क्योंकि वह खुद अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर नहीं है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

👉: Iran Military Warning: ईरान ने अमेरिका और इसराइल को दी चेतावनी, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का एलान

ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या नई चेतावनी दी है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अगर 6 अप्रैल 2026 तक ईरान ने Strait of Hormuz को पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों और दूसरे जरूरी ढांचों को तबाह कर सकता है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ईरान के साथ चल रहे विवाद में अपने लक्ष्यों को पूरा करने के करीब है और वह इस काम को पूरा करके ही दम लेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के नए राष्ट्रपति ने युद्धविराम की मांग की है। हालांकि, अमेरिका इस पर तभी विचार करेगा जब यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और खुला होगा। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह से झूठा बताया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संकट का क्या असर हो रहा है?

होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव की वजह से समुद्री यातायात पर काफी बुरा असर पड़ा है। मौजूदा स्थिति और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:

  • ब्रिटेन की बैठक: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर 4 अप्रैल 2026 को एक मीटिंग करेंगे जिसमें इस रास्ते को खोलने के लिए कूटनीतिक रास्तों पर चर्चा होगी। इसमें अमेरिका शामिल नहीं होगा।
  • 35 देशों का गठबंधन: ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और UAE समेत 35 देशों ने एक बयान जारी कर ईरान से रास्ता न रोकने की मांग की है।
  • ईरान के नए नियम: ईरान ने 1 अप्रैल को घोषणा की थी कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को तेहरान के बनाए नए नियमों का पालन करना होगा और केवल गैर-विरोधी जहाजों को ही निकलने की अनुमति मिलेगी।
  • जहाजों की कतार: मार्च के आंकड़ों के मुताबिक, सुरक्षा के डर से बहुत सारे तेल टैंकर और मालवाहक जहाज इस रास्ते के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र का कदम: सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पर वोटिंग होने वाली है जो इस रास्ते में जहाजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की इजाजत दे सकता है।

UAE जैसे देश इस रास्ते को खुलवाने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ईरान का इस रास्ते पर कंट्रोल उनकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। ईरान अभी भी जहाजों पर हमले कर रहा है और उसकी शर्त है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने हमले बंद नहीं करेंगे, वह भी पीछे नहीं हटेगा।