अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ हुए ceasefire यानी युद्धविराम को खत्म करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर अब हमला हुआ तो उसका जवाब 20 गुना ज़्यादा कड़ा होगा। Trump का कहना है कि अमेरिका सैन्य तौर पर पहले ही जीत चुका है और ईरान के पास अब कोई फौज नहीं बची है।
नाटो समिट में Trump के कड़े तेवर
तुर्कि예 के अंकारा में 8 और 9 जुलाई 2026 को हुई NATO समिट के दौरान Donald Trump ने ईरान पर भरोसा न करने की बात कही। उन्होंने ईरान के नेताओं को बहुत कठोर शब्दों में संबोधित किया और कहा कि पिछला समझौता अब खत्म हो चुका है। Trump ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान पर पहले ही कई बार जोरदार हमले किए हैं।
तेल और बिजली केंद्रों पर हमले की धमकी
Trump ने धमकी दी है कि अमेरिका अब ईरान के आम नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। इसमें वहां के तेल, बिजली और पानी की सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही उन्होंने Kharg Island को जब्त करने की बात भी कही जो ईरान के तेल निर्यात के लिए बहुत ज़रूरी जगह है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक ही झटके में ईरान के बड़े नेताओं को खत्म कर सकता है।
बढ़ता सैन्य टकराव और हमले
तनाव इतना बढ़ गया कि 8 और 9 जुलाई को अमेरिका ने ईरान पर नए सैन्य हमले किए। इससे पहले ईरान ने Strait of Hormuz में जहाजों और Bahrain और Kuwait में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। जवाब में ईरान की IRGC और सेना ने Bahrain और Kuwait की तरफ मिसाइलें दागीं और अमेरिका के एक ड्रोन को मार गिराया।
ईरान और दुनिया की प्रतिक्रिया
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने Trump की बातों को ताकत के गलत इस्तेमाल का सबूत बताया। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिकी नीति को डराने-धमकाने वाला कहा। वहीं पूर्व IRGC कमांडर Mohsen Rezaei ने Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से बदला लेने की बात कही।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर NATO चीफ Mark Rutte ने Trump के फैसले का समर्थन किया लेकिन स्पेन के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे गलत बताया। UN, पाकिस्तान और Qatar ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने और संयम बरतने की अपील की है। Oman के विदेश मंत्री ने इस स्थिति पर दुख जताया और आरोप लगाया कि इजरायल अमेरिका की नीतियों को प्रभावित कर रहा है।
