अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान समझौता करने में बहुत ज्यादा समय ले रहा है और वह उस पर नए सैन्य हमलों के आदेश देने के बिल्कुल करीब हैं। इससे ठीक एक दिन पहले अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 20 सैन्य ठिकानों पर बमबारी की थी, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। इस घटनाक्रम से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
अमेरिका ने ईरान पर क्यों किए हमले और ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 9 जून को ईरान के हवाई रक्षा प्रणालियों और रडार ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई 8 जून को एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में आत्मरक्षा में की गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ईरान ने बातचीत की प्रक्रिया को बहुत लंबा खींच दिया है, इसलिए उसे इसका हर्जाना भुगतना पड़ेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों देश एक शांति समझौते के बहुत करीब थे, जिसे अगले दो से तीन दिनों में पूरा किया जा सकता था।
ईरान का पलटवार और खाड़ी देशों पर हमलों का असर
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद 10 जून की सुबह ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में बने उन सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। कुवैत और जॉर्डन की सेनाओं ने अपने हवाई क्षेत्र में आए इन मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है और खुद के बचाव के अधिकार की बात कही है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासी कामगारों के लिए इस क्षेत्र की सुरक्षा बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
शांति वार्ता और संघर्ष विराम की वर्तमान स्थिति
अमेरिका और ईरान के बीच वैसे तो 8 अप्रैल 2026 से एक संघर्ष विराम समझौता लागू है। हालांकि, ताजा हमलों के बाद इस समझौते के टूटने का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने बयान दिया है कि बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हुई है क्योंकि अमेरिका समझौते के मसौदे में बदलाव करने की कोशिश कर रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में पूरी तरह से युद्धविराम नहीं हो जाता, वह बातचीत को आगे नहीं बढ़ाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर हमले क्यों किए?
अमेरिकी सेना द्वारा 9 जून को ईरान के रडार और हवाई सुरक्षा ठिकानों पर किए गए हमलों के विरोध में ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इन देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता क्यों रुकी हुई है?
ईरान का आरोप है कि अमेरिका समझौते के नियमों में बदलाव कर रहा है। साथ ही ईरान ने लेबनान में पूरी तरह से युद्धविराम होने तक बातचीत को निलंबित रखने का फैसला किया है।
