अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। Trump ने साफ चेतावनी दी है कि ईरान के पास अब समय बहुत कम है और उन्हें जल्द ही शांति समझौते की ओर बढ़ना होगा। इस खींचतान का असर अब दुनिया भर के शेयर बाजारों और तेल की कीमतों पर भी दिखने लगा है।

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Trump ने ईरान को क्यों दी चेतावनी और क्या कहा?

Donald Trump ने अपने Truth Social प्लेटफॉर्म पर ईरान को सख्त संदेश भेजा है। उन्होंने कहा कि ईरान को बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे वरना उनके पास कुछ नहीं बचेगा। Trump ने ईरान द्वारा दिए गए पिछले प्रस्तावों को पूरी तरह से बेकार और कमजोर बताया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय बहुत कीमती है और बातचीत में और देरी नहीं होनी चाहिए। यह बयान उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से बातचीत के बाद दिया है।

ईरान की क्या शर्तें हैं और उनका क्या रुख है?

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि ईरान कभी भी दुश्मन के आगे नहीं झुकेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा मजबूती से करेगा। ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को आत्मसमर्पण के समान बताया है। ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • युद्ध हर्जाना: अमेरिका द्वारा युद्ध के नुकसान की भरपाई की जाए।
  • समुद्री नियंत्रण: Strait of Hormuz पर ईरान का पूरा अधिकार हो।
  • प्रतिबंध: ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए।
  • संपत्ति: जब्त की गई ईरानी संपत्ति को तुरंत वापस किया जाए।

ईरान के विदेश मंत्रालय और संसद के अधिकारियों का कहना है कि वे केवल अपने जायज अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

दुनिया पर क्या असर पड़ा और कौन बीच-बचाव कर रहा है?

18 मई 2026 को Trump की चेतावनी के बाद एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई। इस विवाद को सुलझाने के लिए Pakistan और Oman बीच-बचाव की कोशिश कर रहे हैं। वहीं China और Trump इस बात पर सहमत हुए हैं कि Strait of Hormuz को व्यापार के लिए खुला रखना जरूरी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Trump और ईरान के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?

मुख्य विवाद शांति समझौते की शर्तों को लेकर है। Trump ईरान के प्रस्तावों को बेहद कमजोर मान रहे हैं, जबकि ईरान अमेरिका की शर्तों को अनुचित और आत्मसमर्पण जैसा बता रहा है।

इस तनाव का अंतरराष्ट्रीय बाजार पर क्या असर हुआ?

18 मई 2026 को तनाव बढ़ने के कारण एशियाई शेयर बाजार नीचे गिर गए और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।