अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने एक साथ मिलकर एक बड़ा फैसला लिया है। दोनों नेताओं ने साफ कर दिया है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी। यह कदम दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की सप्लाई को बिना किसी रुकावट के चालू रखने के लिए उठाया गया है।
ईरान क्यों वसूल रहा है ट्रांजिट फीस और इस पर विवाद क्या है?
ईरान की संसद ने मार्च 2026 में एक योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने की बात कही गई थी। ईरान इस फीस को सुरक्षा शुल्क बता रहा है और इसे IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) संभाल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ जहाजों से लगभग 150,000 डॉलर की फीस ली जा रही है। चीन, ग्रीस, पाकिस्तान और फ्रांस के कुछ जहाजों ने यह फीस चुकाई भी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और अमेरिका का इस पर क्या रुख है?
UNCLOS (यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी) के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों जैसे कि Strait of Hormuz में जहाजों को ‘ट्रांजिट पैसेज’ का अधिकार है। कानून के अनुसार, कोई भी देश सिर्फ रास्ता देने के लिए टोल नहीं वसूल सकता। अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने चेतावनी दी है कि ईरान को ट्रांजिट फीस देने वालों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ओमान ने भी ईरान के इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। हालांकि, राष्ट्रपति Trump ने पहले एक बार ईरान के साथ मिलकर टोल वसूलने की बात कही थी, लेकिन अब उन्होंने और चीन ने इसका विरोध किया है।
जहाजों की स्थिति और भारत पर इसका क्या असर है?
इस विवाद का सीधा असर समुद्री व्यापार और जहाजों पर पड़ रहा है। भारत के शिपिंग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 13 भारतीय जहाजों ने इस रास्ते को पार किया, जबकि अन्य 13 जहाज वहां फंसे हुए हैं। हाल ही में अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े एक तेल टैंकर M/T Skywave को जब्त किया और एक अन्य जहाज M/T Celestial Sea की जांच की। इस तनाव की वजह से उन देशों और कंपनियों की परेशानी बढ़ गई है जो इस रास्ते से तेल का आयात करते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz में टोल टैक्स को लेकर विवाद क्या है?
ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा शुल्क के नाम पर करीब 150,000 डॉलर वसूलना चाहता है, जिसे अमेरिका, चीन और ओमान ने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है।
अगर कंपनियां ईरान को फीस देती हैं तो क्या होगा?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और OFAC ने चेतावनी दी है कि ईरान को ट्रांजिट फीस का भुगतान करने वाली कंपनियों या संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
