अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने बीजिंग में एक बड़ी मीटिंग की। इस मीटिंग में दोनों नेताओं ने तय किया कि Strait of Hormuz में किसी भी तरह की ट्रांजिट फीस या टोल नहीं लिया जाना चाहिए। दोनों देशों ने साफ कहा कि इस समुद्री रास्ते को खुला रखा जाए और यहां किसी भी तरह की सैन्य सख्ती न हो।
Trump और Xi ने ट्रांजिट फीस पर क्या फैसला लिया?
बीजिंग समिट के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर पैसे वसूलना गलत है। व्हाइट हाउस से मिली जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति Trump और Xi दोनों ने इस रास्ते को टोल-फ्री रखने की बात कही है। इससे पहले 30 अप्रैल 2026 को अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और चीन के विदेश मंत्री Wang Yi भी इस बात पर सहमत हुए थे कि किसी भी देश को यहां टोल लेने की इजाजत नहीं होनी चाहिए।
चीन ने अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति Xi ने कहा कि चीन अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा ताकि उसे Strait of Hormuz पर कम निर्भर रहना पड़े।
ईरान का क्या कहना है और IMO ने क्या चेतावनी दी?
दूसरी तरफ ईरान इस मामले में अलग राय रखता है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि वे ‘ट्रांजिट फीस’ नहीं ले रहे हैं, बल्कि यह जहाजों की सुरक्षा, नेविगेशन और बचाव कार्यों के लिए ली जाने वाली ‘सर्विस फीस’ है। हालांकि, खबरों के मुताबिक ईरान कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की भारी रकम मांग रहा था। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा कि उनके लिए यह रास्ता सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है।
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के महासचिव Arsenio Dominguez ने साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय रास्तों पर टैक्स या टोल लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने UNCLOS कानून का हवाला दिया, जो सभी कमर्शियल जहाजों को बिना किसी पैसे के आने-जाने का अधिकार देता है।
| तारीख | मुख्य घटना/अपडेट |
|---|---|
| 28 अप्रैल 2026 | IMO ने टोल लगाने को गैरकानूनी बताया |
| 30 अप्रैल 2026 | US और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच सहमति |
| 12 मई 2026 | US स्टेट डिपार्टमेंट ने टोल विरोध की पुष्टि की |
| 14 मई 2026 | Trump और Xi ने बीजिंग में टोल फीस खारिज की |
| मार्च/मई 2026 | ईरान द्वारा कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर की मांग |
भारतीय प्रवासियों और व्यापार के लिहाज से यह खबर अहम है क्योंकि ईरान ने संकेत दिया है कि भारतीय जहाजों को इस रास्ते से गुजरने में प्राथमिकता दी जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz में ट्रांजिट फीस को लेकर विवाद क्या है?
ईरान इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस लेना चाहता है, जबकि अमेरिका, चीन और IMO इसे अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के खिलाफ मानते हैं।
क्या भारतीय जहाजों पर इसका असर पड़ेगा?
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री ने पुष्टि की है कि भारतीय जहाजों को इस रास्ते से गुजरने के लिए प्राथमिकता दी जा रही है।
