अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump चीन की राजधानी Beijing पहुंचे हैं जहाँ उनकी मुलाकात राष्ट्रपति Xi Jinping से हुई। इस बैठक का मुख्य मकसद ईरान के साथ चल रहे युद्ध को रोकना और व्यापारिक मसलों को सुलझाना है। दोनों देशों के बीच इस बात पर चर्चा हुई कि ईरान को बातचीत की मेज पर वापस कैसे लाया जाए ताकि समुद्र का रास्ता फिर से खुल सके।
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ईरान और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर क्या है पूरा विवाद?
अमेरिका और चीन दोनों चाहते हैं कि Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) का रास्ता खुला रहे क्योंकि यहाँ से तेल का बड़ा कारोबार होता है। इस मुद्दे पर मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- अमेरिका की स्थिति: अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान को बातचीत के लिए मनाने में उन्हें चीन की मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। हालाँकि, राष्ट्रपति Trump ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अमेरिका ने ईरान पर पूरा नियंत्रण रखा है और उन्हें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है।
- ईरान का रुख: ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने साफ़ कर दिया कि तेल शिपिंग का यह रास्ता बंद रहेगा। वहीं ईरान के राष्ट्रपति Pezeshkian ने कहा कि अगर उनके अधिकारों को मान्यता मिली और मुआवज़ा दिया गया, तभी वे संघर्ष खत्म करने पर विचार करेंगे।
Taiwan और हथियारों की डील पर China की क्या शर्त है?
चीन ने अमेरिका द्वारा ताइवान को दिए जाने वाले हथियारों का कड़ा विरोध किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस स्थिति का फ़ायदा उठा सकता है:
- हथियारों का विरोध: चीन अमेरिका के 11 अरब डॉलर के हथियारों के पैकेज के खिलाफ है।
- बदले में माँग: जानकारों का कहना है कि चीन ईरान पर दबाव बनाने के बदले में ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति में बदलाव चाहता है। चीन चाहता है कि अमेरिका साफ़ तौर पर ताइवान की आज़ादी का विरोध करे।
- ताज़ा अपडेट: खबर है कि समिट की वजह से अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को हथियारों की बिक्री में देरी की है। दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि ताइवान के प्रति उनकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Trump और Xi Jinping की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान युद्ध को रोकना, व्यापारिक समझौतों को ठीक करना और ताइवान को हथियारों की बिक्री जैसे मुद्दों पर चर्चा करना है।
ईरान ने Strait of Hormuz को लेकर क्या कहा है?
ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने कहा है कि तेल शिपिंग का यह रास्ता बंद रहेगा और राष्ट्रपति Pezeshkian ने मुआवज़े और अंतरराष्ट्रीय गारंटी की माँग की है।
