ट्यूनीशिया में प्रवासियों की नाव डूबने से कम से कम 19 लोगों की मौत, गुस्साए लोगों ने किया जोरदार प्रदर्शन

ट्यूनीशिया के दक्षिण-पूर्व इलाके में स्थित बेन गूर्डाने शहर में उस समय भारी तनाव फैल गया जब इटली जाने की कोशिश कर रही प्रवासियों की एक नाव समुद्र में डूब गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 19 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। शुरुआती खबरों में कम लोगों के हताहत होने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में अस्पतालों और मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों से साफ हुआ कि मरने वालों का आंकड़ा काफी बढ़ चुका है।
नाव हादसे की दर्दनाक सच्चाई और लापता लोगों की तलाश
यह दुखद घटना गुरुवार, 21 अगस्त 2026 की सुबह हुई थी। प्रवासियों को ले जा रही यह नाव ज़ारज़िस के तट से लगभग 14 नॉटिकल मील दूर समुद्र में डूब गई। नाव पर कुल 15 लोग सवार थे, और ये सभी बेन गूर्डाने इलाके के ही रहने वाले थे। इस हादसे में एक ही परिवार के सात सदस्य और एक व्यक्ति अपनी गर्भवती पत्नी के साथ यात्रा कर रहा था। शुरुआत में 11 शव मिलने और एक जीवित शख्स के मिलने की खबर आई थी, जो 48 घंटे तक समुद्र में तैरता रहा था।
इसके बाद अस्पताल के अधिकारियों और ट्यूनीशियन ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया कि सोमवार, 24 अगस्त 2026 तक समुद्र से कम से कम 19 शव बाहर निकाले जा चुके हैं। शवों की पहचान पुख्ता करने के लिए डीएनए टेस्ट का काम तेजी से चल रहा है। इस बीच, लापता लोगों की तलाश के लिए कोस्ट गार्ड, सेना, सिविल डिफेंस और स्थानीय स्वयंसेवक मछुआरे लगातार मिलकर काम कर रहे हैं। ट्यूनीशिया के नेशनल गार्ड के प्रवक्ता हौसेम एडिन जेबाबली ने मीडिया को बताया कि तलाश और बचाव अभियान अभी भी जोर-शोर से जारी है। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी Saudi Press Agency (SPA) की रिपोर्ट से ली गई है।
सड़कों पर उतरा लोगों का गुस्सा और सुरक्षा बलों से झड़प
इस भयानक हादसे से गुस्साए स्थानीय निवासियों ने लगातार दो रातों तक जोरदार प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाए और सुरक्षा बलों के साथ उनकी तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। आम जनता सरकार और प्रशासन से मांग कर रही है कि लापता लोगों को ढूंढने का काम तेजी से पूरा किया जाए। इसके अलावा, क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के पक्के साधन और आर्थिक सुधार लाने की भी पुरजोर मांग की जा रही है, क्योंकि लोग खराब होते जीवन स्तर और नौकरी न मिलने से बेहद परेशान हैं।
यह पूरा मामला केंद्रीय भूमध्य सागर में बने खतरनाक हालातों को सामने लाता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) इस रास्ते को दुनिया का सबसे खतरनाक प्रवासी मार्ग मानता है। संगठन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में इस रास्ते पर अपनी जान गंवाने वाले प्रवासियों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है, जो प्रवासियों की मजबूरी और हालातों की गंभीरता को साफ बयान करती है।