लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बुधवार, 22 जुलाई 2026 को यमन के हूती समूह द्वारा सऊदी अरब पर समुद्री नाकेबंदी की धमकी की कड़ी निंदा की है। तुर्की ने साफ तौर पर रियाद के साथ एकजुटता दिखाई है और सभी पक्षों से अपील की है कि वे क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली किसी भी कार्रवाई से बचें।
समुद्री रास्तों पर संकट का खतरा
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने 20 या 21 जुलाई के आसपास सऊदी अरब पर ‘नेविगेशन बैन’ की घोषणा की थी। इसे उन्होंने यमन में हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर सऊदी अरब द्वारा लगाए गए कथित प्रतिबंधों का जवाब बताया है। हूतियों का दावा है कि उनकी इस चेतावनी के बाद पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब के छह जहाज वापस लौट गए हैं। इस घटना के बाद, दो सऊदी तेल टैंकरों ने भी लाल सागर में अपना रास्ता बदल लिया है, जो अब स्वेज नहर की ओर बढ़ रहे हैं।
सऊदी अरब और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
सऊदी विदेश मंत्रालय ने हूतियों के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे। इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 जुलाई को स्पष्ट किया कि यदि हूती समूह व्यापारिक जहाजों को रोकने की कोशिश करेगा, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने में पीछे नहीं हटेगा। इसके अलावा अरब लीग के महासचिव नबील फहमी के साथ-साथ कुवैत, यूएई, पाकिस्तान, मिस्र, यूके और मॉरिटानिया ने भी हूतियों की कार्रवाई की निंदा करते हुए सऊदी अरब को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
