इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, तुर्किए ने इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने की मांग की.

Sushma Kumari22 August 20265 min read39 viewsWorld
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, तुर्किए ने इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने की मांग की.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस समय हलचल बहुत तेज हो गई है और तुर्किए ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। अंकारा की सरकार ने इंटरपोल से यह मांग की है कि नेतन्याहू के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया जाए। तुर्किए का यह आरोप है कि नेतन्याहू गाजा में कथित तौर पर नरसंहार और मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है और दुनिया भर की निगाहें इस कानूनी और राजनीतिक खींचतान पर टिकी हुई हैं।

रशिया टुडे की रिपोर्ट और तुर्किए के न्याय मंत्री का बयान

रूस के अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क रशिया टुडे (RT) से मिली जानकारी के अनुसार, तुर्किए के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बात की पूरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बेंजामिन नेतन्याहू उन 35 आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें एक्टिविस्टों द्वारा संचालित किए जाने वाले 'ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला' से जुड़े मामले में वांटेड घोषित किया गया है। तुर्किए की तरफ से इस मामले में नरसंहार, मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध, यातना देना, लोगों की स्वतंत्रता को अवैध तरीके से छीनना, परिवहन वाहन को हाईजैक करना और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं।

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तुर्किए के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश इस बात को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा कि गाजा में की गई सैन्य कार्रवाइयों के लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी तरह से जवाबदेही से बचाया जा सके। उन्होंने नेतन्याहू सरकार पर खुलकर यह आरोप लगाया कि वे गाजा पट्टी में सोची-समझी नीति के तहत नरसंहार को बढ़ावा दे रहे हैं।

इंटरपोल रेड नोटिस का क्या मतलब होता है

आम पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि इंटरपोल रेड नोटिस असल में दुनिया भर के सदस्य देशों की पुलिस के लिए एक औपचारिक अनुरोध होता है। इसके जरिए किसी भी वांटेड व्यक्ति का पता लगाया जाता है और संबंधित देश के स्थानीय कानूनों के मुताबिक उसे अस्थायी रूप से हिरासत में लिया जाता है। हालांकि, कानूनी जानकारों का यह भी कहना है कि एक रेड नोटिस अपने आप में कोई अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता है, लेकिन इससे आरोपी की आवाजाही और उसकी कानूनी मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।

फ्लोटिला विवाद और इज़राइल का पक्ष

इस पूरे विवाद के पीछे समुद्री जहाजों का एक बड़ा घटनाक्रम भी जुड़ा हुआ है। इज़राइली नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा की तरफ जाने वाले कई फ्लोटिला को रोक दिया था। बीते मई महीने में लगभग 50 नौकाओं पर सवार 400 से अधिक एक्टिविस्टों को हिरासत में लिए जाने की बड़ी खबरें सामने आई थीं, जिन्हें बाद में ग्रीस भेज दिया गया था। इन हिरासत में लिए गए एक्टिविस्टों ने बाद में इज़राइली सुरक्षा बलों पर दुर्व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए थे।

दूसरी तरफ, इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उनका यह कहना था कि फ्लोटिला में शामिल जितने भी लोग थे वे पूरी तरह से सुरक्षित थे और किसी के साथ कोई गलत बर्ताव नहीं किया गया था।

तुर्किए और इज़राइल के बीच बढ़ता कूटनीतिक तनाव

गाजा में चल रहे युद्ध को लेकर तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन लगातार नेतन्याहू की तीखी आलोचना करते आ रहे हैं। राष्ट्रपति एर्दोगन ने कई मौकों पर नेतन्याहू की तुलना एडॉल्फ हिटलर से तक कर दी है और इज़राइल पर फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ नरसंहार करने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी एर्दोगन को यहूदी-विरोधी तानाशाह करार दिया है और तुर्किए पर यह आरोप लगाया है कि वे खुद अपने देश में कुर्दों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं।

दोनों देशों के बीच तनाव सिर्फ गाजा या बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीरिया के मुद्दों को लेकर भी हालात काफी खराब हुए हैं। तुर्किए ने बीते 18 अगस्त को सीरिया के अबू अल-दुहुर एयरबेस पर इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमले की कड़ी निंदा की थी। हालांकि इस हमले में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं आई थी, लेकिन वहां हाल ही में तैयार किए गए रनवे को काफी नुकसान पहुंचा था। इसके जवाब में इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने एर्दोगन को सीरिया में तुर्किए की सैन्य गतिविधियों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी। हालांकि, सीरिया और तुर्किए दोनों ने इज़राइल के उस दावे को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि उस इलाके में तुर्किए के सैनिकों को तैनात करने की कोई योजना थी। अमेरिका के सीरिया और इराक मामलों के विशेष दूत टॉम बैराक ने भी इज़राइली हमले की आलोचना करते हुए इसे तनाव बढ़ाने वाला एक पूरी तरह से अनावश्यक कदम बताया था।

अंतरराष्ट्रीय अदालतों में पहले से चल रही है कानूनी कार्रवाई

नेतन्याहू के खिलाफ यह नया कदम ऐसे संवेदनशील समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके खिलाफ पहले से ही कई गंभीर कानूनी मामले चल रहे हैं। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी आईसीसी ने नवंबर 2024 में गाजा में कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के पुख्ता मामलों को लेकर नेतन्याहू और इज़राइल के तत्कालीन रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके अलावा, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी आईसीजे में दक्षिण अफ्रीका की तरफ से इज़राइल के खिलाफ नरसंहार का एक मामला दर्ज है जिसकी सुनवाई अभी भी जारी है।

इज़राइल सरकार ने हमेशा की तरह नेतन्याहू के खिलाफ लगाए गए इन तमाम आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। इज़राइल आईसीसी का सदस्य देश नहीं है, लेकिन वह आईसीजे के नियमों के दायरे में आने वाले राज्यों में शामिल है। अब तुर्किए की तरफ से रेड नोटिस जारी करने की इस आधिकारिक मांग के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और कूटनीतिक दबाव और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना बन गई है।

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