तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने ऐलान किया है कि वह ईरान में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए मिडिल ईस्ट के कई देशों का दौरा करेंगे. न्यूज़ एजेंसी Reuters और Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, 17 मार्च 2026 को इस योजना की जानकारी दी गई है. इस दौरे का मुख्य मकसद क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव को कम करना और शांति बहाल करने के लिए दबाव बनाना है.

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तुर्की की कूटनीतिक तैयारी और बातचीत

तुर्की इस युद्ध को रोकने के लिए पिछले कुछ समय से लगातार प्रयास कर रहा है. Hakan Fidan ने 28 फरवरी 2026 से ही क्षेत्रीय देशों के विदेश मंत्रियों के साथ गहन कूटनीतिक बातचीत शुरू कर दी थी. बातचीत में ईरान, इराक, सऊदी अरब, कतर, सीरिया, मिस्र और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि शामिल रहे हैं.

इन बैठकों का उद्देश्य हमलों को रोकना और स्थिति को और खराब होने से बचाना है. तुर्की का स्पष्ट रूप से मानना है कि कूटनीति ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है. तुर्की ने आगाह किया है कि इस तरह के संघर्ष से आतंकी गुटों को फायदा होता है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर भी भारी संकट आता है.

ईरान की स्थिति और तुर्की का रुख

पूरे संघर्ष में तुर्की ने अपना रुख तटस्थ (Neutral) रखा है. तुर्की ने जहां ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों की आलोचना की है, वहीं खाड़ी देशों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई को भी अनुचित बताया है. 15 मार्च 2026 को Fidan ने जानकारी दी थी कि ईरान पर्दे के पीछे से (back-channel) बातचीत करने के लिए तैयार है. हालांकि, ईरान के भीतर नेतृत्व में बदलाव और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रभाव के कारण बातचीत की स्थिति थोड़ी जटिल बनी हुई है.

इसके अलावा, तुर्की ने ईरान को अस्थिर करने या वहां गृह युद्ध भड़काने की किसी भी बाहरी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी है. तुर्की और ईरान के बीच 560 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा है, ऐसे में तुर्की चाहता है कि ईरान की क्षेत्रीय सीमा का पूरी तरह सम्मान किया जाए और किसी भी तरह के विभाजन से बचा जाए.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.