तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता का समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा है कि तुर्की हमेशा से बातचीत और कूटनीति के जरिए मुद्दों को सुलझाने के पक्ष में रहा है। राष्ट्रपति एर्दोगन ने 24 मई 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य क्षेत्रीय नेताओं के साथ फोन पर बात की और इस शांति समझौते का स्वागत किया। इस समझौते से खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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अमेरिका और ईरान के बीच क्या समझौता होने जा रहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि ईरान के साथ एक शांति समझौता काफी हद तक तैयार हो चुका है और इसके आखिरी बिंदुओं पर चर्चा चल रही है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने की बात कही गई है। इसके अलावा, समुद्री नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह से हटा लिया जाएगा और ईरान के फ्रीज किए गए पैसों का एक हिस्सा शुरुआती चरण में जारी कर दिया जाएगा। इस समझौते के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए दो महीने का समय दिया जाएगा।

राष्ट्रपति एर्दोगन और अन्य देशों का इस पर क्या कहना है?

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि उनका देश इस संभावित समझौते को लागू करने में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। उनका मानना है कि एक सही और निष्पक्ष शांति समझौते से किसी को नुकसान नहीं होता है। वहीं पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने भी 23 मई 2026 को ईरान के नेताओं से मुलाकात की थी, जिसमें काफी अच्छी प्रगति हुई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस बातचीत का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपने नियंत्रण की बात दोहराई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता पक्का हो गया है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि समझौता काफी हद तक तय हो चुका है और आखिरी दौर की बातचीत जारी है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह अभी एक शुरुआती ढांचा है, जिस पर आगे चर्चा होनी है।

होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान का क्या रुख है?

अमेरिकी दावों के विपरीत, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा। समझौते के बाद भी इसे बिना किसी शर्त के पूरी तरह पहले की तरह नहीं खोला जाएगा।