अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते को लेकर दुनिया की नजरें टिकी हैं. तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने चेतावनी दी है कि इसराइल को इस ceasefire यानी युद्धविराम को खराब नहीं करने देना चाहिए. उन्होंने कहा कि नेतन्याहू की सरकार इस शांति प्रक्रिया से खुश नहीं है और वह इसमें रुकावट डाल सकती है.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या है पूरा मामला?
पाकिस्तान की मदद से अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते का ceasefire तय हुआ था. यह समझौता 22 अप्रैल 2026 को खत्म होने वाला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 अप्रैल को कहा कि ईरान के साथ जंग अब खत्म होने के करीब है और अगले दो दिनों में बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने भी कहा कि बातचीत जारी रहना बहुत जरूरी है.
इलाके में अभी क्या हलचल मची है?
शांति की कोशिशों के बीच क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है और कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं. नीचे दी गई टेबल में ताजा हालात की जानकारी दी गई है:
| घटना | विवरण |
|---|---|
| हिजबुल्ला | उत्तरी इसराइल में करीब 30 रॉकेट दागे |
| इसराइल | दक्षिणी लेबनान में 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया |
| तेहरान | दो धमाकों में तीन लोग घायल हुए |
| अमेरिकी सेना | ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी पूरी तरह लागू की |
| पाकिस्तान PM | शांति प्रयासों के लिए सऊदी, कतर और तुर्की का दौरा कर रहे हैं |
इसराइल और अन्य संगठनों का क्या कहना है?
इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि यह ceasefire कभी भी टूट सकता है. उन्होंने साफ किया कि वह ईरान और उसके साथियों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. वहीं IAEA के डायरेक्टर राफेल ग्रॉसी ने कहा कि किसी भी डील में ईरान की परमाणु गतिविधियों की जांच के लिए बहुत बारीक और कड़े उपाय होने चाहिए. तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने जोर दिया कि बातचीत बंद मुट्ठियों से नहीं बल्कि शब्दों से होनी चाहिए.
