Turkey Saudi Arabia और Pakistan का बड़ा समझौता, मक्का पैक्ट के तहत मिलिट्री मैकेनिज्म तैयार.

तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने मिलकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है और रणनीतिक सैन्य सहयोग के लिए औपचारिक तंत्र स्थापित कर दिए हैं। 7 अगस्त 2026 को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, अब तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने इसकी औपचारिक घोषणा की है। इस नए समझौते से तीनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य मामलों में तालमेल बेहतर होगा और क्षेत्रीय सुरक्षा को एक नई ताकत मिलेगी।
अंकारा में हुई प्रेस ब्रीफिंग में हुआ बड़ा खुलासा
अंकारा में 13 अगस्त 2026 को हुई एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, तुर्की के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रियर एडमिरल Zeki Akturk ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इन नई संरचनाओं के तहत तीनों देशों के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और सैन्य प्रमुख एक साथ मिलकर काम करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च स्तर पर रणनीतिक तालमेल बिठाना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सके और आपसी सहयोग को मजबूत किया जा सके।
नाटो की तर्ज पर काम करेगा सामूहिक रक्षा समझौता
इस नए समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नाटो के आर्टिकल 5 की तर्ज पर एक सामूहिक रक्षा खंड शामिल किया गया है। इसका साफ मतलब यह है कि अगर किसी एक भी सदस्य देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक है और यह किसी भी खास देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है। इसका एकमात्र मकसद क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी साझाकरण पर जोर
इस नए फ्रेमवर्क के तहत आने वाले दिनों में तीनों देश मिलकर बड़े स्तर पर संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगे। इन अभ्यासों में थल सेना, नौसेना, वायु सेना और मानवरहित यानी ड्रोन सिस्टम को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, रक्षा उद्योग के उत्पादन और तकनीक को आपस में साझा करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे तीनों देशों की सैन्य क्षमताएं बढ़ेंगी और भविष्य की संभावित चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। इस समझौते से खाड़ी देशों और पाकिस्तान के बीच रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है।