सऊदी अरब और तुर्की के बीच रेलवे लिंक बनाने की तैयारी तेज़ हो गई है। तुर्की के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने बताया है कि इस प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग से जुड़ी कोई रुकावट नहीं है। इस रेल नेटवर्क से दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्रा काफी आसान हो जाएगी।

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सऊदी अरब और तुर्की ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिलाया है। 9 जून 2026 को रियाद में दो अहम समझौतों (MoUs) पर साइन किए गए। सऊदी ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर Saleh Al-Jasser और तुर्की ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर Abdulkadir Uraloglu ने इन कागज़ात पर दस्तखत किए। इस समझौते में रेलवे टेक्नोलॉजी, सिग्नलिंग सिस्टम और डिजिटल बदलाव जैसे मुद्दों पर काम करने की बात कही गई है।

यह रेलवे लाइन पुराने ‘हिजाज़ रेलवे कॉरिडोर’ को फिर से ज़िंदा करेगी। यह ट्रेन सऊदी अरब से शुरू होकर जॉर्डन और सीरिया होते हुए तुर्की पहुंचेगी। इसमें इराक को भी जोड़ा जा सकता है। अभी सऊदी की रेल लाइन जॉर्डन बॉर्डर तक है और तुर्की की लाइन सीरिया बॉर्डर के पास तक पहुँच चुकी है। अब बस सीरिया और जॉर्डन के बीच करीब 400 किलोमीटर का रास्ता बनाना बाकी है।

इस रेल लिंक का इस्तेमाल सामान, तेल, नेचुरल गैस और यात्रियों को ले जाने के लिए किया जाएगा। हज यात्रा पर जाने वाले जायरीन भी इसका फायदा उठा सकेंगे। भविष्य में इसे UAE, कुवैत, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों और फिर यूरोप तक जोड़ने की योजना है।

तुर्की के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर Abdulkadir Uraloglu के मुताबिक, इस काम को पूरा होने में 3 से 4 साल का समय लग सकता है। वहीं, सऊदी ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर Saleh Al-Jasser ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी स्टडी साल 2026 के अंत तक पूरी हो जाएगी। ट्रायल रन पहले ही किए जा चुके हैं और रास्ता बिल्कुल सही पाया गया है।

यह प्रोजेक्ट सऊदी अरब के विज़न 2030 का हिस्सा है, जिसका मकसद किंगडम को दुनिया का बड़ा लॉजिस्टिक्स हब बनाना है। इससे समुद्र के रास्तों पर निर्भरता कम होगी और व्यापार के लिए एक नया ज़मीनी रास्ता मिलेगा।