रूस-यूक्रेन युद्ध पर तुर्की की बड़ी चेतावनी, बढ़ता संघर्ष मॉस्को को पहुंचा सकता है आखिरी विकल्प तक

Sushma Kumari15 August 20263 min read68 viewsWorld
रूस-यूक्रेन युद्ध पर तुर्की की बड़ी चेतावनी, बढ़ता संघर्ष मॉस्को को पहुंचा सकता है आखिरी विकल्प तक

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भयानक युद्ध को लेकर तुर्किए (Turkey) के विदेश मंत्री हाकान फिदान (Hakan Fidan) ने एक बहुत गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर यह तबाही मचाने वाला संघर्ष इसी तरह आगे भी बढ़ता रहा, तो रूस अपने पास मौजूद आखिरी विकल्प का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह मजबूर हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले में तुरंत कड़े कदम उठाने की जरूरत है ताकि स्थिति को और ज्यादा बिगड़ने से रोका जा सके।

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू (Anadolu) के एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान मंत्री फिदान से यह सवाल पूछा गया था कि क्या मौजूदा हालात रूस को अपने सबसे अंतिम विकल्प को चुनने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि अगर जंग यूं ही फैलती गई तो मॉस्को के सामने ऐसी स्थिति जरूर पैदा हो जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि रूसी अधिकारियों के साथ उनकी बैठकों में भी इस बड़े खतरे को लेकर चर्चा हुई थी। उनके मुताबिक पश्चिमी देश भी इस खतरे की बात से पूरी तरह वाकिफ हैं और उन्होंने इस बारे में पश्चिमी देशों को अपनी चिंताओं से अवगत भी करा दिया है।

युद्ध का दायरा लगातार फैल रहा है

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फिदान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि युद्ध को लेकर पहले जिन बातों के लिए मना किया जा रहा था, आज बिल्कुल वही सब होता हुआ दिखाई दे रहा है। यह संघर्ष अब केवल कुछ खास सीमाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह भौगोलिक रूप से भी फैल चुका है और इसके लड़ने के तरीके व लक्ष्य भी लगातार बदल रहे हैं। इस खतरनाक जंग का असर अब सीधे तौर पर आम नागरिकों की बस्तियों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है, जो कि एक बहुत डराने वाली बात है।

मध्यस्थ देशों और खासकर अमेरिका (USA) का आंकलन यह है कि जब तक रूस और यूक्रेन दोनों के पास एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करने के वास्ते सैन्य ताकत बची है, तब तक दोनों में से कोई भी देश पीछे हटने या कोई रियायत देने को तैयार नहीं होगा। जब तक दोनों पक्ष किसी बीच के रास्ते पर आकर थोड़ी छूट देने को राजी नहीं होते, तब तक किसी भी देश के लिए शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना बहुत मुश्किल साबित होगा।

एक-दूसरे को थकाने की फिराक में दोनों देश

तुर्किए के विदेश मंत्री का मानना है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही इस समय सिर्फ एक ही इंतजार कर रहे हैं कि कैसे सामने वाले को पूरी तरह थका दिया जाए। जब दोनों पक्ष पूरी तरह थक जाएंगे, तभी शायद वे बातचीत की टेबल पर आने की सोच सकते हैं। उन्होंने इस लंबी लड़ाई को 'फ्रंटलाइन पर घिसने वाला युद्ध' का नाम दिया है, जहां सैनिक लगातार मोर्चे पर ड्रोन और तोप के गोलों का सामना कर रहे हैं और रोजाना भारी मात्रा में पैसा व सैनिक मैदान में झोके जा रहे हैं।

जब तुर्किए ने खुद बीच में आकर दोनों के बीच बातचीत कराने की कोशिश की थी, तब समझौते की थोड़ी सी उम्मीद जगी थी। लेकिन जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच आपसी मतभेद इतने ज्यादा थे कि कोई पक्की बात नहीं बन पाई। बातचीत फेल होने के बाद अब यह युद्ध ऐसे खतरनाक मोड़ पर आ चुका है जहां बर्बादी केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि पीछे के इलाकों में रहने वाले आम लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

फिदान ने अंत में चेताया कि जब युद्ध का दायरा मैदान से बाहर निकल जाता है, तब बात सिर्फ हार और जीत की नहीं रह जाती। ऐसी गंभीर स्थिति में किसी भी देश के वजूद पर सवाल खड़े हो जाते हैं और वह अपनी रक्षा के लिए हर उस आखिरी विकल्प का इस्तेमाल करने की तरफ कदम बढ़ा देता है जो उसके पास बचा होता है। रूस, यूक्रेन, अमेरिका और यूरोप के इस युद्ध को लेकर अपने-अपने अलग नजरिए और रणनीतिक आकलन हैं, और 'युद्ध खत्म करना बाकी सभी हितों से बढ़कर है' इस बात को अभी तक सभी पक्षों ने पूरी तरह से नहीं अपनाया है।

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