रूस-यूक्रेन युद्ध पर तुर्की की बड़ी चेतावनी, बढ़ता संघर्ष मॉस्को को पहुंचा सकता है आखिरी विकल्प तक

Praggya Singh sabal9 August 20264 min read68 viewsWorld
रूस-यूक्रेन युद्ध पर तुर्की की बड़ी चेतावनी, बढ़ता संघर्ष मॉस्को को पहुंचा सकता है आखिरी विकल्प तक

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भयानक युद्ध को लेकर तुर्किए (Turkey) के विदेश मंत्री हाकान फिदान (Hakan Fidan) ने एक बहुत गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि अगर यह तबाही मचाने वाला संघर्ष और ज्यादा आगे बढ़ता है, तो रूस अपने पास मौजूद आखिरी विकल्प का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह मजबूर हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बढ़ते खतरे को रोकने के लिए तुरंत और कड़े कदम उठाने की जरूरत है ताकि बात और ज्यादा न बिगड़े।

अनाडोलू एजेंसी के कार्यक्रम में हुआ खुलासा

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू (Anadolu Agency) के एडिटर डेस्क प्रोग्राम के दौरान बातचीत करते हुए विदेश मंत्री हाकान फिदान ने यह अहम बयान दिया। उनसे पूछा गया था कि क्या मौजूदा हालात रूस को अपने सबसे अंतिम और कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इस सवाल के जवाब में उन्होंने साफ कहा कि अगर दोनों देशों के बीच लड़ाई इसी तरह बढ़ती रही, तो मॉस्को के सामने वह स्थिति पैदा हो सकती है जहां उसे अपने हर आखिरी विकल्प का इस्तेमाल करना पड़े।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

फिदान ने यह भी बताया कि रूसी अधिकारियों के साथ उनकी जितनी भी बैठकें और बातचीत हुई हैं, उनमें इस संभावित और बड़े खतरे पर खुलकर चर्चा की गई थी। उनका दावा है कि दुनिया के पश्चिमी देश भी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं और इस खतरे को समझते हैं। उन्होंने अपनी तरफ से पश्चिमी देशों को भी इस गंभीर स्थिति और अपनी चिंताओं से पूरी तरह अवगत करा दिया है ताकि समय रहते कोई ठोस उपाय सोचा जा सके।

अब आम नागरिकों के इलाकों तक पहुंच रहा है युद्ध

तुर्किए के विदेश मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध को लेकर शुरुआत में जिन बातों के लिए मना किया जा रहा था कि ऐसा नहीं होगा, आज वही सब कुछ धरातल पर होता हुआ दिखाई दे रहा है। यह संघर्ष अब केवल कुछ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने दायरे और तरीकों दोनों में लगातार फैलता जा रहा है। अब इस खूनी संघर्ष का असर सीधे तौर पर आम नागरिकों वाले रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है, जिससे बेकसूर लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

मध्यस्थ देशों, और खासकर अमेरिका (USA) का आंकलन यह कहता है कि जब तक रूस और यूक्रेन दोनों के पास एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने के लिए पूरी सैन्य ताकत मौजूद है, तब तक कोई भी पक्ष आसानी से झुकने या रियायत देने को तैयार नहीं होगा। जब तक दोनों पक्ष किसी बीच के रास्ते पर आकर थोड़ी बहुत छूट देने के लिए राजी नहीं होते, तब तक शांति की बात आगे बढ़ाना किसी भी मध्यस्थ देश के लिए बहुत मुश्किल काम साबित होगा।

एक-दूसरे को थका देने की रणनीति पर काम

फिदान का मानना है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही इस समय लंबी रणनीति के तहत एक-दूसरे को पूरी तरह थका देने का इंतजार कर रहे हैं। जब दोनों पक्ष मैदान में थक जाएंगे, तभी वे शायद बातचीत की मेज पर आने के बारे में सोचेंगे। उन्होंने इस लंबी लड़ाई को फ्रंटलाइन पर घिसने वाला युद्ध बताया है, जहां मोर्चे पर तैनात सैनिक लगातार ड्रोन और तोपखाने के हमलों का सामना कर रहे हैं और रोज युद्ध के मैदान में नया पैसा और नए सैनिक झोंके जा रहे हैं।

जब तुर्किए ने खुद आगे आकर मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी और दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की कोशिश की थी, तब शांति समझौते की कुछ हल्की उम्मीदें जगी थीं। लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच इतने गहरे मतभेद थे कि वे किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच पाए। बातचीत के फेल होने के बाद अब युद्ध ऐसे खतरनाक मोड़ पर आ चुका है, जहां तबाही केवल मोर्चे तक सीमित नहीं है बल्कि पीछे के इलाकों में भी फैल रही है।

अस्तित्व की लड़ाई बन सकता है संघर्ष

फिदान ने चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा कि जब युद्ध का दायरा मैदान से बाहर निकल जाता है, तब मामला सिर्फ जीत या हार का नहीं रह जाता है। ऐसी डरावनी स्थिति में किसी भी राष्ट्र के अपने अस्तित्व का बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है और देश अपने बचाव में हर उस अंतिम विकल्प का इस्तेमाल करने की तरफ कदम बढ़ाता है जो उसके पास उपलब्ध होता है।

रूस, यूक्रेन, अमेरिका और यूरोप के इस युद्ध को देखने के अपने-अपने अलग नजरिए और रणनीतिक आकलन हैं। अभी तक किसी भी पक्ष ने इस मूल सिद्धांत को पूरी तरह नहीं अपनाया है कि युद्ध को खत्म करना बाकी सभी हितों से कहीं ज्यादा ऊपर है। कुछ देशों और पक्षों को लगता है कि अगर उन्होंने अभी युद्ध बंद किया तो उन्हें इसे जारी रखने की तुलना में कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है, और यही गलत सोच आज इस संघर्ष को रोकने की सभी कोशिशों में सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ी है।

Share:

Comments

Leave a comment