ईरान की यूनिवर्सिटीज पर हुए हमलों के बाद अब तुर्की के सैकड़ों प्रोफेसरों ने अपनी नाराजगी जताई है। तुर्की की काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन (YÖK) और कई बड़ी यूनिवर्सिटीज ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। इन हमलों में कई छात्रों और प्रोफेसरों की जान गई है जिससे शिक्षा जगत में काफी तनाव है।

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किन यूनिवर्सिटीज पर हुए हमले और कितना हुआ नुकसान

फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच ईरान की कई बड़ी यूनिवर्सिटीज को निशाना बनाया गया। इनमें ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इसफहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जैसे संस्थान शामिल थे। ईरान के विज्ञान मंत्री हुसैन सिमाई-सर्राफ के मुताबिक 30 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज पर हमले हुए। इन हमलों में 60 से ज्यादा छात्र और 10 प्रोफेसर मारे गए।

तुर्की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का क्या कहना है

तुर्की की YÖK और मिडिल ईस्ट टेक्निकल यूनिवर्सिटी (METU) ने इन हमलों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना वैज्ञानिक तरक्की में बाधा डालता है। तुर्की की यूनिवर्सिटीज ने प्रभावित ईरानी छात्रों की मदद करने का फैसला किया है और उन्हें रजिस्ट्रेशन में छूट देने की बात कही है। वहीं 218 अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने इसे मानव इतिहास के लिए खतरा बताया है।

ईरान की प्रतिक्रिया और IRGC की चेतावनी

ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र (UN) तक पहुँचाया है और इसे युद्ध अपराध बताया है। ईरान ने इन हमलों के लिए अमेरिका और इसराइल को जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी तरफ, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने इन हमलों की निंदा नहीं की तो मिडिल ईस्ट में अमेरिकी यूनिवर्सिटी कैंपस निशाने पर आ सकते हैं।