Turkiye का बड़ा ऐलान: यूरोप को गैस सप्लाई के लिए तीन अरब देशों के साथ नेटवर्क बनाने की तैयारी

तुर्की एक बार फिर ऊर्जा के क्षेत्र में खुद को ग्लोबल हब बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है। Kuwait News Agency (KUNA) की 5 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही तीन अरब देश उनके प्रस्तावित नेचुरल गैस पाइपलाइन नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य-पूर्व से यूरोप तक नेचुरल गैस की निर्बाध आपूर्ति करना है, जिससे तुर्की एक प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में स्थापित हो सके। हालांकि, अभी उन तीन अरब देशों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है जो इस प्रोजेक्ट में शामिल हो सकते हैं, लेकिन यह तुर्की की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक कोशिशों का हिस्सा है।
ऊर्जा हब बनने की ओर तुर्की के बड़े कदम
तुर्की की योजना काफी पुरानी है और इसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स का समर्थन मिल रहा है। साल 2013 में Mashreq–EU Natural Gas Pipeline Project के लिए एक सहमति बनी थी, जिसका मकसद अरब देशों की नेचुरल गैस पाइपलाइन को तुर्की, इराक और यूरोपीय संघ से जोड़ना था। इस योजना में मिस्र, जॉर्डन, लेबनान और सीरिया जैसे देश शामिल थे। तुर्की के ऊर्जा मंत्री Alparslan Bayraktar के मुताबिक, कतर के 'नॉर्थ डोम' गैस फील्ड से तुर्की तक गैस पाइपलाइन बिछाने का एक पुराना प्रस्ताव भी है। इस पर काम तभी आगे बढ़ पाएगा जब सीरिया में शांति और स्थिरता बनी रहे।
समुद्र के रास्ते गैस और बिजली का विस्तार
तुर्की ने अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जमीन पर काम भी शुरू कर दिया है। जुलाई 2026 में तुर्की ने अपने दक्षिणी तट से उत्तरी साइप्रस तक 101 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया है। इस पाइपलाइन का काम 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है और साल 2028 से यह सेवा शुरू हो जाएगी। शुरुआत में इसका उपयोग उत्तरी साइप्रस को गैस देने के लिए होगा, लेकिन बाद में इसे उल्टा चलाकर पूर्वी भूमध्य सागर से गैस लेकर उसे यूरोप तक पहुंचाया जाएगा।
सिर्फ गैस ही नहीं, तुर्की ने बिजली के निर्यात में भी बड़ी दिलचस्पी दिखाई है। जून 2026 में तुर्की और अजरबैजान ने मिलकर एक क्षेत्रीय बिजली निर्यात गलियारा बनाने की घोषणा की है, जिसमें जॉर्जिया और बुल्गारिया भी सहयोग करेंगे। यह कदम यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में तुर्की की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। इन सभी विकास कार्यों से आने वाले समय में क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, जिससे खाड़ी और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक संबंध और गहरे होंगे।