अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी शांति डील होने की उम्मीद काफी बढ़ गई है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और खाड़ी देशों के कई बड़े नेताओं के साथ फोन पर एक विशेष बातचीत की है। इस दौरान राष्ट्रपति एर्दोगन ने साफ किया कि तुर्की इस संभावित समझौते को लागू करवाने में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। इस महत्वपूर्ण टेलीकॉन्फ्रेंस में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और बहरीन जैसी क्षेत्रीय ताकतों के शीर्ष नेताओं ने भी हिस्सा लिया है।
इस संभावित समझौते में क्या-क्या बातें शामिल हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया है कि ईरान के साथ युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर लगभग पूरी बातचीत हो चुकी है और अब इसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। इस समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- 60 दिनों का सीजफायर: दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम की अवधि को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना: इस समुद्री मार्ग से व्यापार को आसान बनाने के लिए ईरान वहां बिछाई गई अपनी बारूदी सुरंगों को साफ करेगा।
- यूरेनियम संवर्धन पर बातचीत: अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को लेकर दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत जारी रहेगी।
तुर्की के राष्ट्रपति का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से मुक्त आवागमन सुनिश्चित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी और खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
बातचीत में शामिल होने वाले प्रमुख देशों के नेता और उनकी प्रतिक्रिया
इस बड़ी चर्चा में क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण नेताओं ने हिस्सा लिया है, जिसके बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आई है:
- खाड़ी देशों के शासक: बातचीत में बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय शामिल रहे।
- पाकिस्तान की भूमिका: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी इस फोन कॉल में शामिल थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बताया कि बातचीत में काफी सकारात्मक प्रगति हुई है और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने शांति प्रयासों के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प को बधाई दी है।
इस समझौते को लेकर इसराइल की क्या चिंताएं हैं?
एक तरफ जहां इस समझौते को लेकर खाड़ी देशों में उत्साह है, वहीं दूसरी तरफ इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से इस मुद्दे पर अलग से फोन पर बात की है। हालांकि यह बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन इसराइल के कुछ वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि यह समझौता सुरक्षित नहीं है। इसराइल को डर है कि इस डील से ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिल सकता है। इसके अलावा लेबनान से जुड़ी शर्तों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चर्चाओं को टालने को लेकर भी इसराइल ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित डील में क्या मुख्य बातें शामिल हैं?
इस समझौते में 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाना, ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाना और यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर आगे बातचीत जारी रखना शामिल है।
इस समझौते पर तुर्की का क्या रुख है?
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा है कि तुर्की बातचीत के जरिए शांति का समर्थन करता है और इस समझौते को जमीन पर लागू करने के लिए हर संभव सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है।