UAE में रहने वाले लोगों और प्रवासियों के लिए एक बहुत जरूरी चेतावनी जारी की गई है। अब हैकर्स AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके लोगों को ठगने के नए तरीके अपना रहे हैं। सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि डीपफेक, फर्जी पहचान और फिशिंग के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आपकी निजी जानकारी और पैसा चोरी हो सकता है।

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AI साइबर हमलों के नए तरीके और आंकड़े

UAE गवर्नमेंट साइबर सिक्योरिटी काउंसिल और अबू धाबी इमरजेंसी, क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर ने बताया कि साइबर अपराधी अब बहुत एडवांस हो गए हैं। डॉ मोहम्मद हमद अल कुवैती ने जानकारी दी कि UAE में रोजाना 5 लाख से 7 लाख साइबर हमले हो रहे हैं। इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा डिजिटल सेंधमारी AI-पावर्ड फिशिंग के जरिए की जा रही है।

  • हैकर्स अब AI का इस्तेमाल करके ऐसी फर्जी आवाजें और वीडियो बना रहे हैं जो बिल्कुल असली लगते हैं।
  • स्मार्ट होम डिवाइस के जरिए पहचान चोरी करने और फर्जी क्रिप्टोकरेंसी या गोल्ड इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाने के मामले बढ़े हैं।
  • ईरान जैसे देशों द्वारा AI टूल्स और ChatGPT का इस्तेमाल करके UAE को निशाना बनाने की खबरें भी सामने आई हैं।
  • अर्थव्यवस्था मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री के नाम से भी फर्जी डीपफेक वीडियो बनाए गए, जिसमें उन्हें निवेश की सलाह देते दिखाया गया था।

इन नियमों का रखें ध्यान वरना होगी कानूनी कार्रवाई

UAE सरकार ने साइबर अपराधों को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 34 (2021) के तहत डीपफेक बनाना, फर्जी जानकारी फैलाना या किसी के इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट के साथ छेड़छाड़ करना बड़ा अपराध है। इसके लिए सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत आपकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखना अनिवार्य है।

आम जनता और प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे इन बातों का खास ख्याल रखें:

  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच जरूर करें।
  • AI ऐप्स के साथ अपनी फोटो शेयर न करें, क्योंकि इससे आपकी बायोमेट्रिक पहचान चोरी हो सकती है और आपके नाम पर फर्जी अकाउंट खुल सकते हैं।
  • सरकारी अधिकारियों के नाम पर आने वाले अर्जेंट मैसेज और कॉल्स से सावधान रहें।
  • UAE मीडिया काउंसिल के मुताबिक, बिना मंजूरी के राष्ट्रीय प्रतीकों या सार्वजनिक हस्तियों के AI वीडियो बनाना कानूनी उल्लंघन है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

AI फिशिंग क्या है और यह कैसे काम करती है?

AI फिशिंग में अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके बहुत ही असली लगने वाले मैसेज और ईमेल भेजते हैं। ये संदेश सुरक्षा फिल्टर को चकमा दे देते हैं और लोगों को धोखा देकर उनकी निजी जानकारी या पासवर्ड चुरा लेते हैं।

डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे करें?

हमेशा आधिकारिक सरकारी सोर्स या वेबसाइट से ही जानकारी की पुष्टि करें। अगर कोई वीडियो या ऑडियो संदिग्ध लगे, तो उस पर भरोसा करने के बजाय संबंधित विभाग से संपर्क करें।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.