UAE अब दुनिया में आने वाली आपदाओं और मानवीय संकटों को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करेगा। इसके लिए सरकार एक Humanitarian Aid Predictive Centre बनाने की तैयारी कर रही है। इस सिस्टम की मदद से यह पहले ही पता चल जाएगा कि कहाँ संकट आने वाला है ताकि समय रहते मदद पहुँचाई जा सके।
अबू धाबी में Presidential Court के Office of Development Affairs ने Humanitarian Aid Predictive Landscape Roundtable का आयोजन किया। यह चर्चा जून 2026 में हुई जिसमें दुनिया भर के एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही Sheikh Theyab bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan की देखरेख में एक हाई-लेवल सेशन भी आयोजित किया गया ताकि आने वाले समय में आपदाओं से निपटने की तैयारी को मज़बूत किया जा सके।
UAE Aid Agency के रणनीतिक योजना निदेशक Rashed Al Hemeiri ने बताया कि तकनीक की मदद से संसाधनों को सही जगह और सही समय पर पहुँचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि AI जटिल पैटर्न को बहुत तेज़ी से समझ सकता है जिससे किसी छोटे संकट को बड़ी तबाही बनने से रोका जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि तकनीक इंसानों द्वारा पैदा किए गए युद्धों को नहीं रोक सकती लेकिन उनके असर को कम ज़रूर कर सकती है।
Office of Development Affairs के डायरेक्टर Dr. Tareq Al Ameri ने कहा कि दुनिया भर में मानवीय सहायता के लिए बजट कम हो रहा है। ऐसे में AI का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं और जोखिमों का अंदाज़ा लगाने के लिए बहुत ज़रूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्यवाणी पर एक डॉलर खर्च किया जाए तो बाद में होने वाले भारी खर्च को काफी कम किया जा सकता है।
इस पहल से जुड़ी कुछ अहम बातें नीचे दी गई हैं:
- अभी इस सेंटर को बनाने के लिए Feasibility Study (व्यवहार्यता अध्ययन) चल रही है।
- सूडान में पहले से ही सैटेलाइट इमेजरी और मशीन लर्निंग के ज़रिए खेती और खाने की कमी पर नज़र रखी जा रही है।
- Rockefeller Foundation हैती, सोमालिया और फिलीपींस के कुछ इलाकों में ऐसे पायलट प्रोग्राम चलाने में मदद कर रहा है।
- सितंबर 2023 में UAE ने एक डिजिटल रिस्पॉन्स प्लेटफॉर्म भी शुरू किया था जिससे आपदा प्रभावित देश अपनी ज़रूरतें बता सकें।
इस पूरे प्रोजेक्ट में UN की एजेंसियां जैसे OCHA, UNHCR, WFP, UNICEF और वर्ल्ड बैंक भी शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सहायता पहुँचाने का काम राजनीतिक कारणों के बजाय केवल ज़रूरतों के आधार पर हो और मदद पहुँचाने की रफ़्तार को बढ़ाया जा सके।