संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब चाँद पर अपने नागरिक को भेजने की तैयारी कर रहा है। मोहम्मद बिन राशिद स्पेस सेंटर (MBRSC) के चीफ ने कहा है कि अगले 10 साल के भीतर एक эмиराती अंतरिक्ष यात्री चाँद की सतह पर उतरेगा। यह देश के अंतरिक्ष प्रोग्राम के लिए एक बहुत बड़ा कदम होगा।

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यह जानकारी दुबई में 12 फरवरी 2025 को हुए वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट के दौरान MBRSC के डायरेक्टर जनरल सालेम हमैद अल मरि ने दी। उन्होंने बताया कि MBRSC इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। UAE ने नासा और अन्य वैश्विक एजेंसियों के साथ मिलकर आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) पर साइन किए हैं ताकि चाँद पर इंसानों की मौजूदगी को टिकाऊ बनाया जा सके।

UAE चाँद के चारों ओर घूमने वाले एक स्पेस स्टेशन ‘लूनर गेटवे’ (Lunar Gateway) में मदद कर रहा है। इसके लिए UAE एक एयरलॉक सिस्टम बना रहा है। फरवरी 2025 में MBRSC ने Thales Alenia Space के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत वे प्रेशर इक्वलाइज़ेशन यूनिट को डिजाइन और ऑपरेट करेंगे। यह यूनिट 10 टन की होगी और इसे कम से कम 15 साल तक चलाया जाएगा। इस पार्टनरशिप की वजह से UAE उन पहले देशों में शामिल होगा जो गेटवे मिशन के ज़रिये अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद पर भेजेंगे।

अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग भी तेज़ी से चल रही है। जून 2026 में सुल्तान अल नियादी और हज़्ज़ा अल मन्सूरी ने अमेरिका के न्यू मैक्सिको में नासा की दो हफ्ते की जियोलॉजी ट्रेनिंग पूरी की। इसमें उन्हें चट्टानों की पहचान और उनके इतिहास को समझने की ट्रेनिंग दी गई। वहीं नोरा अल मतरुशी और मोहम्मद अल मुल्ला ने मार्च 2024 में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर से ट्रेनिंग पूरी की और वे आर्टेमिस जेनरेशन क्लास से ग्रेजुएट हुए।

रोवर मिशन की बात करें तो UAE का पहला रोवर ‘रशीद’ अप्रैल 2023 में फेल हो गया था। अब MBRSC ‘रशीद 2’ रोवर पर काम कर रहा है। मई 2025 में फायरफ्लाई एयरोस्पेस के साथ समझौता हुआ है, जिसके तहत 2026 की शुरुआत में रशीद 2 को चाँद के दूसरी तरफ (far side) भेजा जाएगा। रशीद 2 का विकास और टेस्टिंग नवंबर 2025 में पूरी हो चुकी है।