रूस की सीमा पर फँसे दो यात्रियों के लिए यूएई के राजदूत एक मसीहा बनकर सामने आए। खबरों के अनुसार, सीमा पर जो काम घंटों लंबा चल सकता था, उसे राजदूत के दखल के बाद मात्र कुछ ही मिनटों में पूरा कर लिया गया। यह घटना अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान कूटनीतिक मदद की अहमियत को स्पष्ट रूप से सामने लाती है।
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रूस में यात्रा के सख्त नियम
रूस में दाखिल होने वाले विदेशी नागरिकों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। यात्रियों के पास कम से कम छह महीने की वैधता वाला पासपोर्ट, रूसी वीज़ा और सीमा नियंत्रण पर जारी होने वाला माइग्रेशन कार्ड होना जरूरी है। जून 2025 से वीज़ा-मुक्त यात्रियों को ruID ऐप पर एडवांस रजिस्ट्रेशन और बायोमेट्रिक जांच कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, यदि किसी यात्री के पास 10,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक की नकदी है, तो उसका कस्टम डिक्लेरेशन देना भी जरूरी है। माइग्रेशन कार्ड को संभाल कर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसे खोने पर भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
यूएई की सक्रिय भूमिका
यूएई का विदेश मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यूएई ने रूस और यूक्रेन के बीच कई बार कैदियों की अदला-बदली कराने में बड़ी सफलता हासिल की है। 26 जून 2026 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, यूएई की मध्यस्थता से अब तक कुल 7,791 कैदियों को रिहा किया गया है, जिसमें 25 बार सफल ऑपरेशन किए गए हैं। इसके अलावा, यूएई में मौजूद रूसी कांसुलर कार्यालयों ने अपने हजारों नागरिकों की मदद की है, जहां 1 मार्च 2026 तक 6,000 से अधिक सहायता के अनुरोध दर्ज किए गए थे।
