पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने पलटवार किया है, जिससे पूरा क्षेत्र तनाव की आग में घिरा हुआ है. इस लड़ाई की वजह से यूएई, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों के तेल और गैस प्लांट तबाह हो गए हैं. अब खाड़ी देशों का भरोसा अमेरिका से धीरे-धीरे उठ रहा है और यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाने की मांग तेज हो गई है.

ईरान ने खाड़ी देशों में कहां-कहां किए हमले?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों को निशाना बनाया. इन हमलों में तेल और गैस के बड़े ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है:

  • UAE: हबशान में अमेरिकी कंपनियों की गैस सुविधा और अल रुवैस के पेट्रोकेमिकल संयंत्र पर हमला हुआ.
  • Bahrain: सित्रा में स्थित पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया गया.
  • Kuwait: शुएबा के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में तबाही मची.
  • Saudi Arabia: देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हमला किया गया.

यूएई में क्यों उठ रही है अमेरिकी ठिकानों को हटाने की मांग?

यूएई के मशहूर टिप्पणीकार अब्दुलखालिक अब्दुल्ला ने कहा कि अब अमीरात को अपनी रक्षा के लिए अमेरिका की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब रणनीतिक फायदे के बजाय एक बोझ बन चुके हैं और इन्हें बंद करने पर विचार करना चाहिए. यूएई ने संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए अमेरिका से वित्तीय मुआवजे की मांग की है. साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि अगर डॉलर की कमी हुई तो वे चीनी युआन जैसी दूसरी मुद्राओं में तेल और गैस का व्यापार कर सकते हैं.

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ताजा हालात क्या हैं?

भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरान से अब तक 2,443 भारतीय नागरिकों को जमीन के रास्ते बाहर निकालने में मदद की गई है. वहीं, कुवैत का हवाई क्षेत्र 24 अप्रैल 2026 को फिर से खोल दिया गया. सैन्य स्थिति की बात करें तो अमेरिका ने अपने मिसाइल भंडार का लगभग 45-50% हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है, जिसमें टॉमहॉक मिसाइलों का 30% शामिल है. फिलहाल पश्चिम एशिया में अमेरिका के तीन युद्धपोत और 200 लड़ाकू विमान तैनात हैं.