UAE की सेना ने अपनी एकता के 50 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर दुबई के फर्स्ट डिप्टी रूलर शेख मक्तूम बिन मोहम्मद ने सेना की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 50 साल पहले लिया गया यह फैसला देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बहुत जरूरी था। इस मौके पर देश के अन्य बड़े नेताओं ने भी सेना के योगदान पर अपने विचार रखे।

UAE सेना की ताकत और नई तकनीक का क्या रोल है?

यूएई की सेना अब पूरी तरह आधुनिक हो गई है। इसमें जमीन, हवा, समुद्र और साइबर सुरक्षा को एक साथ जोड़ा गया है। हाल के दिनों में सेना ने ईरानी हमलों और ड्रोन को हवा में ही रोककर अपनी तैयारी का सबूत दिया है। सरकार अब रक्षा उपकरणों को सिर्फ बाहर से खरीदने के बजाय खुद विकसित करने और बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए मिलिट्री कॉलेजों और अंतरराष्ट्रीय प्रोग्राम्स के जरिए ट्रेनिंग पर भी निवेश किया जा रहा है।

देश के नेताओं ने सेना और सैनिकों के बारे में क्या कहा?

दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद ने सैनिकों के बलिदान को याद किया और उन्हें देश की ढाल और तलवार बताया। वहीं राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने संदेश दिया कि देश की असली ताकत उसकी सेना और समाज की एकता में है। सेना अब सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में मानवीय मदद और राहत कार्यों में भी हिस्सा ले रही है। एक और बड़ी बात यह रही कि अब 11 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं भी नेशनल सर्विस में अपनी इच्छा से शामिल हो रही हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

UAE सेना के एकीकरण की वर्षगांठ कब मनाई जाती है?

यह हर साल 6 मई को मनाई जाती है। साल 2026 में इस मौके पर सेना के एकीकरण के 50 साल पूरे हुए।

यूएई सेना सुरक्षा के अलावा और क्या काम करती है?

यूएई सेना दुनिया भर में मानवीय सहायता, राहत कार्यों और आपातकालीन बचाव अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाती है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.